रेव पार्टी बोले तो अय्याशी का फुल पैकेज

आप सोच रहे होंगे आखिर ये कौन से विज्ञापन हैं? विज्ञापन हैं- जिंदगी की मौज मस्ती और फुल सैटिस्फैक्शन के लिए हमारे साथ जुड़ें और 20 हजार रुपए महीना कमाएं। संपर्क करें- एक्स फ्रेंडशिप क्लब....। फ्रेंडाशिप करें, डे एण्ड नाइट डेटिंग पर जाएं और महीने में 30 हजार से ज्यादा कमाएं। संपर्क करें....। दरअसल ये विज्ञापन हैं उन फ्रेंडशिप क्लबों के जो पैसे का लालच देकर युवाओं को सीधे ड्रग्स और देह व्यापार की ओर खींच रहे हैं। इसे हम कमर्शियल सेक्स वर्कर्स या ड्रग्स सप्लायर्स भी कह सकते हैं।
पुलिसिया सूत्रों की माने तो ये क्लब वही हैं, जो रोजाना अपने यहां रेव पार्टियों में युवक-युवतियों की भीड़ जुटाने के लिए ऐसा करते हैं। पश्चिमी देशों से जब रेव पार्टियों का कल्चर भारत आया तो इसमें सिर्फ अमीर घरानों के लोग जाते थे। वो भी सिर्फ मौज मस्ती और खाली समय को एंज्वॉय करने के लिए। समय बीतने के साथ-साथ इन पार्टियों के अंदर मौज मस्ती की परिभाषा भी बदल गई। मुंबई, चंडीगढ़, दिल्ली, बेंगलुरू, मेंगलुरू, आदि बड़े शहरों में आए दिन रेव पार्टियों के पीछे चल रहे देह व्यापार और ड्रग्स के धंधे के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन हर बार युवक-युवतियां ही पुलिस के शिकंजे में आते हैं। न कि वो जो इस धंधे को चला रहा है।
मध्यमवर्गीय परिवारों की लड़के-लड़कियों पर चढ़ा शौक
मुंबई और लोनावला के बीच स्थित करजत के पब में नशे की पार्टी में पुलिस ने छापा मारा और 350 लोगों को हिरासत में लिया। सभी के ब्लड सैंपल भी लिये गये। साथ ही पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया। इससे पहले भी मुंबई में कई रेव पार्टियों में छापे के दौरान हर बार 200 से 300 युवक-युवतियों के ब्लड सैंपल लिये जा चुके हैं। वहीं चंडीगढ़ में होटल के अंदर पार्टी और पार्टी के दौरान अश्लील डांस। हाल ही में अहमदाबाद के आउटस्कर्ट्स में जंगल में मंगल नाम की रेव पार्टी में भारी मात्रा में ड्रग्स व कॉलगर्ल्स बरामद हुईं। इन सभी पार्टियों में अर्धनग्न अवस्था में लड़कियों को नाचते हुए पुलिस ने पकड़ा। हर बार युवक-युवतियां नशे की हालत में मिले।
खास बात यह है कि इन पार्टियों में अब सिर्फ बड़े बाप की बिगड़ैल औलादें ही नहीं बल्कि मध्यमवर्गीय परिवारों के वो लड़के-लड़कियां भी जाने लगी हैं, जिन्हें घर से या तो खर्चा नहीं मिलता और या फिर उनके खर्च स्टेटस से कहीं ज्यादा हैं। अपनी जरूररतों को पूरा करने के लिए उन्हीं विज्ञापनों का सहारा ले रहे हैं, जो मौज मस्ती के बदले पैसा देने को तैयार हैं। यही नहीं अपने घरों से दूर रहकर पढ़ रहे छात्र-छात्राएं भी इन क्लाबों का शिकार बन रहे हैं। आप अगर एक बार इस माया जाल में फंस गए तो निकलना काफी मुश्किल होता है।
डेटिंग करिए पैसा कमाइये
असल में सेक्स और नशा ये दोनों ही युवाओं को तेजी से जकड़ रहे हैं। इसी के ही परिणाम है कि रेव पार्टियों के बहाने बलात्कार की वारदातें बढ़ी हैं। इसके अलावा रात्रि में लड़कियों के घर से बाहर रहने के चलन ने भी बलात्कार की घटनाओं में इजाफा किया है। घूम-फिर कर बात युवा पीढ़ी के भविष्य पर आकर टिक जाती है, क्योंकि ये ऐसे क्लब सेक्स और मनोरंजन के साथ आय का साधन भी मुहैया करा रहे हैं। वो दिन दूर नहीं जब लखनऊ, कानपुर, आगरा, जलंधर, आदि जैसे शहर भी इसकी चपेट में आ जाएंगे। हालांकि इन के बाहरी इलाके में स्थित फन रिसॉर्ट्स में पार्टियां शुरू भी हो चुकी हैं।
अब बात आती है इन शहरो में फ्रेंडशिप क्लबों की तो पिछले पांच साल में ऐसे क्लब यहां भी सक्रिय हो गए हैं। वो पूरी योजना के साथ। लखनऊ के कई इलाकों में ऐसे फ्रेंडशिप क्लब अभी भी चल रहे हैं। लेकिन फिलहाल ये क्लब रेव पार्टियों तक नहीं पहुंचे हैं। हां यह जरूर है कि बड़ी संख्या में युवा इन क्लबों से जुड़ रहे हैं। करीब ढाई साल पहले लखनऊ के मीडिया ने यह मुद्दा उठाया भी था। लेकिन सरकार ने कोई ऐक्शन नहीं लिया। दरअसल बिना सबूत के कोई ऐक्शन नहीं लिया जा सकता।
रेव पार्टी में मनी, सेक्स एंड प्रोटेक्शन
इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी के श्रीजय नारायण पीजी कॉलेज लखनफ केंद्र के काउंसलर डा. आलोक चांटिया का कहना है कि रेव पार्टियों के पीछे देहव्यापार करने वाले लोग कानून की पहुंच से इसलिए दूर हैं, क्योंकि हमारे संविधान में हर व्यक्ति को संस्था या संगठन बनाने का अधिकार है। अब यदि कोई संस्था अखबारों के माध्यम से फ्रेंडशिप के नाम पर आमंत्रण दे रही है तो वो सीधे तौर पर कामर्शियल प्रॉस्टीट्यूट को बढ़ावा देने जैसा है। देखा जाए तो ऐसे विज्ञापन छापने से पहले अखबारों को भी सोचना चाहिए, क्योंकि अखबार समाज को दिशा दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रेव पार्टियों के पीछे देह व्यापार की बात करें तो यहां पर 'मनी, सेक्स एण्ड प्रोटेक्शन' ये तीनों महत्वपूर्ण हैं। मनी यानी पैसा। पिछले एक दशक में युवाओं में कम उम्र में ही पैसा कमान की ललक बढ़ी है। इसलिए ऐसे विज्ञापन 15 से 20 वर्ष की आयु के लोगों को आसानी से धन कमाने के लिए आकर्षित कर सकते हैं। सेक्स, यह विषय हमेशा से गुप्त रहा है, लेकिन पाश्चात्य संस्कृति के समावेश ने इसकी परिभाषा बदल दी। अब केवल युवक ही नहीं युवतियां भी शादी से पहले सेक्स के लिए तैयार हो रही हैं। इसके पीछे मुख्य कारण है 'प्रोटेक्शन'। आज कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियों ने लोगों को आश्वस्त कर दिया है कि वो पूरी तरह सुरक्षित हैं।
सामाजिक दृष्टिकोण से यह अलार्मिंग सिचुवेशन है। अब यदि सरकार और स्वयं लोग नहीं चेते तो इसके बुरे प्रभाव समाज में पड़ेंगे। सामाजिक विघटन होगा और आने वाले समय में सामाजिक संबंध खत्म होते जाएंगे। वेश्यावृत्ति, नशाखोरी और अपराध बढ़ता जाएगा।
लखनऊ विश्वविद्यालय के विमेंस स्टडीज के लेक्चरर डा. अमित कुमार पाण्डेय का कहना है कि इसका एक कारण बेरोजगारी तो दूसरा लड़कियों में स्टेटस मेनटेन करने की चाह। बेरोजगारी के कारण जहां युवा वर्ग सिर्फ उसी दिशा में देखता है जहां पैसा मिले। और यदि 20 से 30 हजार रुपए महीने का लालच हो तो आकर्षण और भी बढ़ जाता है। इसका फायदा ही ऐसे संगठन उठाते हैं। दूसरा कारण है लड़कियों में टेटस मेनटेन करने की ललक। अपने दोस्तों के बीच स्टेटस मेनटेन करने के चक्कर में भी कई बार लड़कियां धोखा खा जाती हैं और इन क्लबों के चक्कर में पड़ जाती हैं।
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