जेडे हत्याकांड: मकसद का पता ही नही तो फिर कैसा खुलासा

पुलिस द्वारा की गई किसी भी वारदात के खुलासे की यह पहली घटना नहीं है जब उसपर सवालिया निशान खड़ा हुआ हो। इस खुलासे की बात करें तो ऐसा कहना सही नहीं होगा कि पुलिसिया खुलासे में कोई झोल है मगर खुलासे के तरीके को देखे तो कुछ पहलू ऐसे अभी भी बाकी है जिसमें गड़बड़ी की बू आ रही है।
उल्लेखनीय है कि पुलिस द्वारा आरोपियों से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने बताया कि इन सातों आरोपियों जेडे की हत्या करना स्वीकार कर लिया है। आरोपियों ने बताया कि हत्या से 20 दिन पहले छोटा राजन का फोन जेडे की हत्या करने के लिए आया था। उसके बाद 9 व 10 जून को हम हीरानन्दी इलाके में गए थे, लेकिन जेडे नहीं मिला। अगर वह तब भी मिल जाता तो उसे मार दिया जाता। जेडे पर सतीश ने .32 बोर रिवाल्वर से पांच फायर किए थे।
इस घटना को अंजाम देने के लिए 3 मोटरसाईकिल व एक क्वालिस गाडी का प्रयोग किया गया था।
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि जेडे को मारने के बाद सभी जोगेश्वरी गए वहां से हमने छोटा राजन को फोन किया और कहा कि यह तो पत्रकार था, ये हमें पहले क्यों नहीं बताया। इस पर छोटा राजन ने सिर्फ इतना कहा कि पैसें मिल जाएंगे। आरोपियों से हथियार बरामद कर लिए गए है। इससे पहले गिरफ्तार सातों लोगों को सोमवार को कोर्ट में पेश किया गया।
मगर इस खुलासे के बीच कुछ तथ्य ऐसे है जो सवालिया चिन्ह लगा रहे हैं। तो आईए उन तथ्यों पर चर्चा करते हैं। पुलिस ने पूछताछ में जब सारी चीजों का खुलासा कर दिया तो यह क्यों नहीं बता पाई कि हत्या के पीछे मकसद क्या था। अभियुक्तों ने जब पीसीओ से मोस्टवांटेड छोटा राजन को फोन किया तो पुलिस उस तक क्यों नहीं पहुंच रही। पुलिस का कहना है कि इन सभी सवालों का जबाब अभियुक्तों को रिमांड पर लेने के बाद ही दिया जा सकता है। मगर अब देखना यह है कि पुलिस इस हत्याकांड के आका तक पहुंच पाती है या फिर किसी नये खुलासे का सहारा लेकर अपने आप को बचाती है।












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