अनशन पर अडिग बाबा रामदेव ने निकाले कई और बड़े मुद्दे

Baba Ramdev
दिल्‍ली। आजाद भारत के इतिहास बुधवार को जो हुआ वह कभी नहीं हुआ था। जी हां, बाबा रामदेव के दिल्ली पहुंचने पर केंद्र सरकार ने उनकी मान मनौव्वल के लिए जैसे प्रयास किए उसने सियासी जानकारों को हैरान कर रखा है। हैरानी इस बात की कि आखिर सरकार इतनी क्यों डरी हुई है? बाबा रामदेव की मुहिम राष्ट्रहित में है ये सब मानते हैं। सरकार का उनकी मांगों पर रवैया भी देश की जनता से छुपा नहीं है। फिर आखिर पिछले एक-दो दिन में ऐसा क्या हुआ कि पूरी की पूरी सरकार बाबा रामदेव के सामने नतमस्तक सी है।

तो आईए हम आपको बताते हैं। मामला कुछ ऐसा है कि बाबा राम के पास जो मुद्दे हैं उसका जबाब किसी के पास नहीं है। उन्होंने तीन बड़े मुद्दों-जिनके ब्यौरों में और बीसो मुद्दे गुंथे हुए हैं। आज एक प्रेस वार्ता में बाबा ने 4 जून को होने वाले अपने आंदोलन की तस्‍वीर साफ कर दी। उन्‍होंने आंदोलन के पहले अपना कड़ा रवैया दिखाकर सबको हथप्रभ कर दिया। बाबा के इस रवैये से केंद्र सरकार की जान सांसत में है क्योंकि इन मांगों को मानने के लिए 'क्रांतिकारी' बदलाव करने होंगे।

बाबा रामदेव की जो मांगे है उनमें सबसे अहम है 400 लाख करोड़ रुपये का काला धन वापस लाने और 100, 500 और 1,000 के नोट चलन से हटाने जैसी मांगे शामिल हैं। बाबा की कुछ और भी मांगे हैं जिनमें स्‍थानीय भाषाओं के इस्‍तमाल को शिक्षा में प्राथतिकता दी जाये। सशख्‍त लोकपाल बिल को संसद में लाना।

बाबा ने पत्रकारों के बीच चुटकी लेते हुए कहा कि ऐसी आर्थिक व्‍यवस्‍था हो कि एक रुपये के बराबर 50 डॉलर हो ना कि 1 डॉलर के बराबर 50 रुपये हो। बाबा ने जोर देते हुए कहा कि किसानों को व्‍यवस्थित प्रशिक्षण दिया जाये ताकि कृषि का उत्‍पादन कई गुना बढ़ सके। बाबा ने अंत मेंक कहा कि यह मेरा अकेले का आंदोलन नहीं हैं, बल्कि यह आंदोलन पूरे देश का है।

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