पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि के खिलाफ बसपा का प्रदर्शन

बसपा का कहना है कि पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोत्तरी किए जाने से सभी वस्तुओं की दरें बढ़ जाती है। पार्टी मुखिया का कहना है कि यह केन्द्र सरकार का जन विरोधी कदम है इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। इस आन्दोलन में कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों के साथ-साथ सरकार के मंत्रियों ने भी हिस्सा लिया। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना था कि केन्द्र सरकार द्वारा पेट्रोल की कीमत पर से सरकारी नियंत्रण समाप्त करना केन्द्र सरकार का गलत निर्णय था। इस निर्णय का सीधा सा असर आम जनता पर पड़ रहा है।
बसपा पदाधिकारियों का कहना है कि आम आदमी पहले से ही मंहगाई से त्रस्त था ऐसे में पेट्रोल की कीमतों के बढऩे से लोगों की कमर ही टूट गयी है। पेट्रोल के दाम बढऩे से आवश्यक वस्तुओं के दाम आसमान छूने लगे हैं। इस वृद्धि का सबसे अधिक असर गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों को झेलना पड रहा है। बसपा वक्ताओं ने लोगों को स बोधित करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार के इस प्रकार के फैसलों से यह साबित हो रहा है कि सरकार जनता के प्रति असंवेदनशील है।
पार्टी का कहना है कि कांग्रेस पार्टी और मंहगाई एक दूसरे के पर्याय बन चुके हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि केन्द्र की कांग्रसे सरकार को सिर्फ तेल क पनियों के घाटे की चिन्ता सता रही है लेकिन इस बढ़ोत्तरी से जनता को क्या नुकसान उठाना पड़ रहा है यह सोचने की फुर्सत किसी के पास नहीं है। मंहगाई नहीं रोक पाना केन्द्र सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है। वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 2008 पेट्रोल की कीमत 43.30 रुपये प्रति लीटर थी जो अब 68.46 रुपये हो गयी है। आॢथक मंदी के दौरान कारपोरेट जगत को केन्द्र 2008-09 में 4 लाख करोड़ रपये का सब्सिडी राहत पैकेज दिया था। इससे पता चलता है कि सरकार किस प्रकार कारपोरेट जगत पर मेहराब है। जबकि उसे आम जनता की तनिक भी परवाह नहीं है। वक्ताओं ने कहा कि कांग्रेस का हाथ गरीबों व आम जनता के साथ नहीं बल्कि पूंजीपतियों के साथ है।












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