टीनेजर्स में तेजी से बढ़ रही है सिगरेट की लत
बैंगलुरु। विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के मौके पर भारत समेत दुनिया भर में तंबाकू के खिलाफ मुहिम चलाये जा रहे हैं। तमाम सेमिनार और गोष्ठियां आयोजित की जा रही हैं। करोड़ों रुपए खर्च किये जा रहे हैं, लेकिन क्या भारत सरकार अपनी युवा पीढ़ी यानी टीनेजर्स के प्रति सचेत है। शायद नहीं। क्योंकि अगर होती तो आज देश के सभी स्कूलों के 100 मीटर के दायरे में एक भी पान व सिगरेट की दुकान नहीं होती। नीचे तस्वीर में देखें तंबाकू के मामले में कहां है भारत:
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यह वो नियम है जो सुप्रीम कोर्ट ने छह साल पहले जारी किये थे, लेकिन देश के किसी भी शहर में इसका ठोस रूप से पालन नहीं किया गया। आज भी हजारों स्कूलों के 100 मीटर के दायरे में सिगरेट की दुकाने चल रही हैं। यही नहीं एक नियम यह भी है कि नाबालिग बच्चों को पान व सिगरेट बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित होने के बावजूद भी अगर कोई बच्चा दुकान पर पहुंचता है तो दुकानदार बिना झिझक उसे सिगरेट दे देता है। आलम यह है कि देश के 48 प्रतिशत पुरुष तंबाकू का सेवन करते हैं। जिनमें 15 प्रतिशत को सिगरेट की लत है। इनमें 18 वर्ष की आयु से कम आयु वालों की संख्या काफी अधिक है।
सिगरेट की डिब्बियों पर सचित्र चेतावनी के बावजूद सिगरेट पीने वालों में कोई कमी नहीं आयी। अब गुटखा के पैकटों पर भी ऐसी चेतावनी आ गई है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि सिगरेट बनाने वाली कंपनियां फेफड़ों की इतनी धुंधली तस्वीर छापते हैं, कि देखने वालों को समझ नहीं आता वो क्या है। सही मायने में सचित्र चेतावनी भी कारगर साबित नहीं हुई।
सही मायने में अगर देश की युवा पीढ़ी को तंबाकू की खाई में गिरने से रोकना है तो माउथ टू माउथ कम्यूनिकेशन सबसे ज्यादा जरूरी है। क्योंकि पोस्टर, बैनर, विज्ञापन आदि से ज्यादा प्रभावी होता है बोलकर प्रचार करना। दूसरा यह कि सरकार को ऐसे दुकानदारों पर शिकंजा कसने की जरूरत है, जो बच्चों को सिगरेट बेचते हैं या फिर सकूलों के 100 मीटर के दायरे में उनकी दुकाने हैं।
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