दिल्ली कोर्ट में याचिका मंजूर, एंडरसन का होगा प्रत्यर्पण

मुख्य महानगर दंडाधिकारी विनोद यादव ने कहा कि भारत में हर व्यक्ति चाहता है कि दुनिया की सबसे बड़ी पर्यावर्णिक आपदा के मामले में 90 वर्षीय एंडरसन का प्रत्यर्पण हो। उन्होंने कहा, "आखिर याचिका को क्यों ने मंजूर किया जाए। सीबीआई वर्ष 1992 से 2010 तक लगातार एंडरसन के प्रत्यर्पण का प्रयास कर रही है। यह बात हजारों पीड़ित लोगों की भावनाओं से जुड़ी है। एंडरसन को भारत लाने के मामले में सीबीआई नहीं सो रही थी।"
अपने 33 पृष्ठों के आवेदन में सीबीआई ने मांग की है कि एंडरसन के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की जाए। सीबीआई ने कहा, "निचली अदालत का प्राथमिक निष्कर्ष है कि एंडरसन के खिलाफ आपराधिक मामला बनता है।" अदालत ने कहा कि भोपाल की अदालत ने इस मामले में एंडरसन को मुख्य आरोपी बताया था। गैस त्रासदी से पीड़ित लोगों को ध्यान में रखते हुए सीबीआई की प्रत्यर्पण याचिका पर कोई सीमा नहीं लगाई जा सकती। सीबीआई की याचिका को मंजूरी दी जाती है।
अदालत ने कहा कि एंडरसन की जवाबदेही और उसकी जानकारी से इंकार नहीं किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि एंडरसन को इस बात की पूरी जानकारी थी कि यूनियन कार्बाइड के कीटनाशक संयंत्र के डिजाइन और संरचना में खराबी थी और इसके सुरक्षा मानक कमजोर थे, जिसके कारण वर्ष 1984 में 2-3 दिसम्बर की रात को जहरीली गैस का रिसाव हुआ। दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी के रूप में जानी जाने वाली भोपाल गैस त्रासदी में हजारों लोगों की मौत हो गई थी।
एंडरसन को सात दिसम्बर 1984 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद भोपाल की एक अदालत ने उसे जमानत दे दी थी। वह वापस अमेरिका चला गया था और सुनवाई के लिए फिर कभी भारत नहीं आया। वर्ष 1993 में भोपाल के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने उसे फरार घोषित किया था।












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