'मायाजाल' में फंसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट!

आप सोच रहे होंगे कि जाटों को आरक्षण मिलने से मायावती को क्या लाभ मिलने वाला। तो हम आपको बता दें कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 17 प्रतिशत आबादी जाटों की है। यही नहीं केवल मथुरा और बागपत में ही 40 प्रतिशत लोग जाट समुदाय के हैं। और अगर इसी के साथ-साथ बसपा की बात करें तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसपा एक दम शून्य है। ऐसे में जाटों का आंदोलन बसपा के लिए वोटबैंक मजबूत करने का सुनहरा मौका है और मायावती इस मौके को अच्छी तरह भुनाने में जुटी हुई हैं।
अब चाहे रेल रुके चाहे बस, जाटों को आरक्षण दिला कर रहेंगे। कुछ ऐसी ही बातें मायावती के मन में चल रही हैं। परोक्ष रूप से वो अभी तक सिर्फ एक बार आगे आयी और बोलीं कि जाटों का आंदोलन जायज है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में इतना बड़ा आंदोलन चल रहा है और पुलिस ने एक भी लाठी नहीं चलाई। जबकि राजधानी में अगर समाजवादी पार्टी या भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता झंडे लेकर खड़े भर हो जाएं, कि लाठियां बरसनी शुरू हो जाती हैं।
उत्तर प्रदेश में जाटों को पहले से ही ओबीसी के अंतर्गत आरक्षण मिला हुआ है। केंद्र की नौकरियों में आरक्षण की मांग कर रहे जाटों के नेताओं का मायावती को धन्यवाद ही काफी बड़ा संकेत है, जो अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में बसपा का वोट बैंक मजबूत कर सकते हैं।












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