चिदंबरम ने जाटों से मांगी 3 दिन की मोहलत

राजधानी स्थित गृहमंत्रालय के कार्यालय में बुधवार को जाटों के 11 सदस्यीय दल ने पी चिदंबरम से मुलाकात की। यह वार्ता केंद्र सरकार की पहल पर बुलाई गई थी। वार्ता के दौरान केंद्र सरकार ने सरकारी नौकरियों में जाटों को आरक्षण देने में असमर्थता जताई, लेकिन जाट अपने पर अड़े रहे। लंबी बैठक के बाद भी चिदंबरम कोई हल नहीं निकाल सके। लेकिन हां अंत में चिदंबरम ने इस विषय पर सोचने व कैबिनेट के सदस्यों से चर्चा करने के लिए 3 दिन का समय मांगा, जिसे जाटों ने मान लिया।
यह जानकारी देते हुए अखिल भारतीय जाट आरक्षण आंदोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हवा सिंह सांगवान ने बताया कि उनके दल ने तीन दिन का समय तो दे दिया, लेकिन साथ में चेतावनी भी दी कि यदि तीन दिन बाद केंद्र ने कोई ठोस फैसला नहीं लिया तो दिल्ली से हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश जाने वाले अन्य रेलवे रूटों पर भी ट्रेनें रोकी जाएंगी। यही नहीं इसके साथ-साथ वे हरियाणा और यूपी से दिल्ली को दिये जाने वाले पानी और तेल की सप्लाई रोक देंगे।
सांगवान ने कहा कि इस बार वे आंदोलन की चरम सीमा तक जाएंगे। इस बार पूर्वी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के जाट किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे। सांगवान ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि उन्हें धरना स्थल पर किसी भी प्रकार की कमी हो तो खुल कर बतायें, लेकिन पीछे नहीं हटें। क्योंकि यह लड़ाई आर-पार की है। हम पीछे नहीं हटेंगे।
उधर प्रदर्शन के कारण रेलवे को 68 ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं और करीब 30 ट्रेनों का रूट बदलना पड़ा। आलम यह है कि हजारों जाट अपनी दिनचर्या रेलवे ट्रैक पर ही काट रहे हैं। वहीं भोजन पकाते हैं और वहीं खाते हैं। बुधवार को इस आंदोलन में जाट समुदाय की करीब 10 हजार महिलाएं भी शामिल हो गईं। महिलाओं के आगे आने से आंदोलन और तेज हो गया है।












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