नहीं थमा जाट आंदोलन, रेलवे को करोड़ों का नुकसान

लखनऊ। प्रदेश में जाट आन्दोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर जाटो ने आज पांचवें दिन भी लखनऊ-दिल्ली रेलमार्ग पर लगाए जाम के कारण रेलवे को अब तक कई करोड रुपये का नुकसान हुआ है। आन्दोलन के चलते कई रेलगाडियों के मार्ग बदल दिये गये है। तो कई निरस्त कर दी गयी हैं। यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है।

आन्दोलन के छठे दिन आज आन्दोलनकारियों की केन्द्र सरकार से बातचीत होने की संभावना है। इस बाबत जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल केन्द्र सरकार से बातचीत के लिए दिल्ली रवाना हो गया है। दूसरी ओर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहे आन्दोलन से पिछले पांच दिनों से लखनऊ-दिल्ली रेल मार्ग बुरी तरह बाधित है।

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एहतियातन पचास से अधिक रेलगाडियों का मार्ग बदल दिया गया है और कई निरस्त कर दी गयी हैं। रेल अधिकारियों के अनुसार अब तक करीब 72 करोड़ रूपये की हानि हुई हैं। गाडिय़ों के मार्ग बदलने से डीजल के अत्यधिक खर्च के साथ ही काफी संया में यात्री टिकट निरस्त हुये हैं। सुरक्षा बन्दोबस्त पर भी काफी पैसे खर्च हो रहे है।

वहीं आन्दोलनकर्मियों के समर्थन में अब आसपास के गांव वाले भी आ गयें हैं। रेल पटरियों पर जानवर बांध दिये गये हैं। औरतें भी घर का कामकाज निपटाकर धरनास्थल पर पहुंच रही हैं। करीब तीन हजार जाटों काफूरपुर रेलवे स्टेशन के पास रेल मार्ग पर खाट डालकर डेरा जमाए हुये हैं। गजरौला के पास डेरा जमाये आंदोलनकारी रेल पटरियों पर ही खाना बना रहे हैं। रात्रि में वहीं आग जलाकर तापते है। वहीं सो भी रहे हैं। आंदोलनकारियों ने करीब दस स्थानों पर रेल मार्ग बाधित किया है।

तमाम कोशिश के बावजूद आंदोलनकारी धरनास्थल को छोडने के लिए तैयार नहीं हैं।मुरादाबाद मंडल के अतिरिक्त मंडलीय प्रबन्धक ए.के.सिंघल के अनुसार 51 रेलगाडियों के मार्ग परिवर्तित कर उन्हें कानपुर नजीबाबाद और सहारनपुर होकर भेजा जा रहा है जबकि 30 जोडी यात्री गाडियां निरस्त कर दी गयी हैं। जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगों को दरकिनार किये जाने पर आंदोलन और तेज किया जायेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन किसी भी तरह हिंसक नहीं होने दिया जायेगा। उनकी मांगे जायज हैं और वे लोकतांत्रिक ढंग से इसे पूरा किये जाने की कोशिश कर रहे हैं। संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कल बातचीत नहीं होने का ठीकरा राज्य सरकार पर फोडा था और कहा था कि मेरठ मंडल के आयुक्त भुवनेश कुमार ने आश्वासन के बावजूद केन्द्रीय विधि मंत्रालय के अधिकारियों से बातचीत का समय नहीं लिया। उन्होने आज बातचीत की सभावना जतायी। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के अधिकारी आन्दोलन को समाप्त करवाने में कोई रुचि नहीं ले रहे हैं।

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