भोपाल का नाम बदलने का विरोध तेज़, 12 को शांति मार्च

इस मामले को लेकर रविवार को राजधानी में करीब दो दर्जन उच्च शिक्षित युवाओं ने एक बैठक की। जो युवा फेसबुक, ट्विटर आदि वेबसाइट पर इस बात का विरोध कर रहे थे, उन्होंने आज इसी मुद्दे को लेकर बैठक की और आगे शन्ति मार्च निकलने की तैयारी कर रहे हैं। भोपाल और भोपाल के बहार रहने वाले भोपाली फेसबुक पर पेज और ग्रुप पर अपनी राय प्रकट कर रहे हैं। साथ ही साथ लोग सरकार से ऐसा करने का तार्किक कारण पूछ रहे हैं।
इन युवाओं का यही कहना है की सरकार क्यों मूलभूत सुविधाओं जैसे, शिक्षा, सड़क, रोज़गार इन पर ध्यान नहीं दे रही और बिना किसी ठोस वजह के नाम बदलने के मामले मे अपना वक़्त और इतना कीमती पैसा बर्बाद कर रही है? नाम बदलने से क्या कोई भी फायदा भोपाल या प्रदेश की जनता को होगा? यही पैसा अगर दूसरी सुविधाएं जुटाने मे लगाया जाये तो प्रदेश का फायदा होगा। यही सब मुद्दे युवा अपनी शांति मार्च से सरकार के सामने रखना चाहते हैं।
भोपाल का नाम बदले जाने को लेकर युवाओं ने अपने आंदोलन के लिए आगे की रणनीति पर मंथन किया। भोपाल के पढ़े-लिखे और भोपाल को लेकर विस्तृत सोच रखने वाले युवा पूछ रहे हैं कि, नाम बदलने से कोई फायदा हो तो सरकार बताए। इन युवाओं का मकसद सिर्फ शांतिपूर्ण मार्च के जरिये सरकार तक अपनी बात पहुंचाना है।
12 मार्च को वीआईपी रोड से मुख्यमंत्री निवास तक होने वाले 'पीस मार्च फॉर भोपाल' में अब तक 8 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लेने का कहा है। फेसबुक मे इस आंदोलन से 40 हजार से अधिक लोग जुड़ चुके हैं जो अपनी राय प्रकट कर रहे है।" पीस मार्च फॉर भोपाल" 12 मार्च को निकाली जाएगी, जहां से हस्ताक्षर अभियान भी शुरू किया जायेगा और राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखे जायेंगे।












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