सुप्रीम कोर्ट: उच्च टेक्नॉलजी के दौर में प्राइवेसी लगभग समाप्त

नई दिल्ली। राडिया फान टैपिंग मामले में टाटा की ओर से सुप्रमी कोर्ट में दलील पेश की गई कि यदि सरकार को सार्वजनिक हितों की सुरक्षा के लिए फोन टैपिंग का अधिकार प्राप्त है तो उसे लोगों की निजता का सुरक्षा करने का दायित्व भी अपने ऊपर लेना चाहिए। मालूम हो कि रतन टाटा ने राडिया फोन टैपिंग के तथ्य सार्वजनिक होने को अपनी निजता पर हमला बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

टाटा के वकील हरीश साल्वे की इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहाकि उच्च प्रद्योगिकी के तेजी से हो रहे विकास ने लोगों की निजता को आज की तारीख में लगभग समाप्त कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति जी.एस. सिंघवी और न्यायमूर्ति ए.के. गांगुली की पीठ ने गुरुवार को कहा कि आम जीवन में प्रौद्योगिकी के अधिक इस्तेमाल की वजह से निजता 'लगभग समाप्त' हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी का आज के समय में बेहद महत्व है क्योंकि विकीलीक्स के जरिए अमेरिका के गोपनीय दस्तावेजों की सूचनाएं सार्वजनिक होने के बाद से पूरी दुनिया में निजता बनाम सार्वजनिक हित की बहस छिड़ चुकी है। ऐसे समय में जब दुनिया के हर कोने से भ्रष्टाचार की खबरें आ रही हैं निजता की सुरक्षा और सार्वजनिक हित एक-दूसरे के आमने-सामने खड़ हो चुके हैं।

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