रेल बजट : भाजपा ने लेखाजोखा बजट पेश करने की मांग की (लीड-1)
भाजपा की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, "रेल मंत्री द्वारा पेश किए रेल बजट से इस सरकार की निराशाजनक स्थिति के लक्षण नजर आते हैं। सरकार के पास दूरदृष्टि का अभाव है।"
बयान में कहा गया है, "रेलवे की वित्तीय व्यवस्था और इसके प्रदर्शन को लेकर बहुत गड़बड़झाला है। रेलवे की पटरियों की मजबूती और सुरक्षा उपकरणों को बेहतर करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की जब सरकार थी तब रेलवे को मुनाफे का सौदा था। वर्ष 2007-08 में भारतीय रेलवे का नकद अधिशेष 25,000 करोड़ था जो कि अब 1328 करोड़ रह गया है। रेलवे अब किराए पर चल रही है। उसका मुनाफे का दौर अब खत्म हो गया है।"
भाजपा का कहना है, "पिछले दो बजटों में ममता ने होटलों, अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, मॉल, खेल स्टेडियमों और यहां तक कि पश्चिम बंगाल में एक अखबार निकालने की बात की थी। उन्होंने कई रेलगाड़ियां शुरू करने की घोषणा की थी लेकिन इनमें से अधिकांश परियोजनाएं शुरू ही नहीं हुई।"
पार्टी ने कहा, "हम मांग करते हैं कि सरकार को एक लेखजोखा बजट भी पेश करना चाहिए ताकि देश की जनता जान सके कि उसके द्वारा किए गए वादों का आखिरकार क्या प्रदर्शन रहा।"
भाजपा नेताओं ने इसे पश्चिम बंगाल का रेल बजट करार दिया और कहा कि इसके जरिए ममता ने राइटर्स बिल्डिंग के लिए वहां तक छुपी रेल लाइन बिछाने की कोशिश की है। भाजपा के एक नेता ने तो यहां तक कहा, "रेल बजट यानी बंगाल ही बंगाल, बाकी देश कंगाल।"
लोकसभा में भाजपा के उपनेता गोपीनाथ मुंडे ने रेल बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "पश्चिम बंगाल में चुनाव हैं, इसलिए रेल बजट में सिर्फ वादे ही वादे हैं। घोषणाएं ज्यादा और अमल कम है। इस बजट में सारा देश कंगाल है, सिर्फ बंगाल ही बंगाल है।"
उन्होंने कहा, "इस बजट में पिछली घोषणाओं का जिक्र नहीं किया गया है। रेल मंत्री को पिछली घोषणाओं को लेखा-जोखा देना चाहिए। पिछले पांच साल में रेलवे के मुनाफे का जो सपना दिखाया गया था वह गलत साबित हुआ है। बजट में बाजार से 10,000 करोड़ रुपये लेने की बात कही गई है, इसका मतलब ये हैं कि कर्ज लेकर सरकार घी पियेगी।"
भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा, "इस बजट से राहत तो दूर मायूसी ही मायूसी हाथ आई है। बंगाल में राईटर्स बिल्डिंग के लिए छुपी हुई रेल लाइन बिछाने की कोशिश की गई है।"
उन्होंने कहा, "बिहार आज भी उपेक्षित है। बजट से बिहार को निराशा हुई है। सांसदों ने जो गुस्सा दिखाया वह वाजिब था।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications