2जी घोटाला : सीबीआई के समक्ष 21 फरवरी को पेश होंगे शौरी (राउंडअप)
उधर भाजपा ने एस बैंड आवंटन के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और निजी कम्पनी देवास के बीच हुए करार पर सरकार पर फिर से हमला बोला।
एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "शौरी 21 फरवरी को सीबीआई के समक्ष पेश होंगे।"
उन्होंने बताया कि इस सिलसिले में शौरी को सम्मन जारी नहीं किया गया है लेकिन जांच एजेंसी ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला मामले में चल रही छानबीन में उनसे सहयोग मांगा है।
अधिकारी ने बताया कि शौरी से 'पहले आओ, पहले पाओ' की नीति पर लाइसेंस जारी करने के बारे में सवाल पूछे जा सकते हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में वर्ष 2001 में यह नीति शुरू की गई थी। शौरी जनवरी 2003 से मई 2004 तक केंद्रीय दूरसंचार मंत्री थे।
सीबीआई ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद 'यूनिवर्सल एक्सेस सर्विस लाइसेंस' (यूएएसएल) को लेकर एजेंसी की चल रही प्रारंभिक जांच में पूछताछ के लिए तत्कालीन संचार मंत्री से सम्पर्क किया है।
अधिकारी के अनुसार जांच एजेंसी दिवंगत भाजपा नेता प्रमोद महाजन सहित पूर्व संचार मंत्री शौरी और दयानिधि मारन द्वारा आयोजित बैठकों का विधिवत अध्ययन करना चाहती है।
सीबीआई के मुताबिक 'पहले आओ, पहले पाओ' की नीति पर तकरीबन 50 लाइसेंस जारी किए गए और इसका लाभ उठाने वालों में भारती, वोडाफोन और आइडिया जैसी दूरसंचार कम्पनियां शामिल हैं।
शौरी ने पूछताछ के लिए सीबीआई द्वारा बुलाए जाने की पुष्टि की है। शौरी ने कहा कि उन्होंने जांच एजेंसी को संदेश दिया है कि कोलकाता से लौटने के बाद वह 21 फरवरी को पूछताछ के लिए उपस्थित होंगे।
शौरी ने कहा कि वह जांच एजेंसी को कुछ 'आपत्तिजनक दस्तावेज' दिखाएंगे और अपने साथ उन दस्तावेजों को भी ले जाएंगे 'जिन्हें वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपना चाहते थे।'
सर्वोच्च न्यायालय की इस सिलसिले में छानबीन को और विस्तार देने सम्बंधी निर्देश के बाद सीबीआई ने शौरी को पेश होने को कहा है।
इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने भाजपा के नेतृत्व वाली राजग और कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन(सप्रंग) सरकार के कार्यकाल वर्ष 2001 से 2007 के दौरान जारी किए गए टेलीकॉम लाइसेंस के बारे में पूछताछ करने का भी निर्देश दिया था।
उल्लेखनीय है कि शौरी ने गुरुवार को कहा था कि उन्होंने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा की देखरेख में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में भ्रष्टाचार को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ ही सीबीआई को अगाह किया था।
भाजपा नेता ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने जांच एजेंसी को इस मामले से जुड़े एक शख्स के बारे में बताया था। शौरी ने कहा, "मैंने वर्ष 2009 में प्रधानमंत्री से कहा था कि अगर वह अपने प्रधान सचिव टी.के.ए. नैयर से मिल सकेंगे तो, उन्हें इस सिलसिले में पूरा विवरण मुहैया करा देंगे।"
उधर मुम्बई में भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पार्टी किसी भी जांच के लिए तैयार है। "हमारे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है।"
प्रसाद ने हालांकि पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री के उस दावे से असहमति जताई जिसमें शौरी ने कहा था कि उन्होंने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले के बारे में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं सुषमा स्वराज एवं अरुण जेटली को बताया था लेकिन उन्होंने कोई रुचि नहीं ली।
शौरी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रसाद ने कहा, "हमने इस मुद्दे को संसद और बाहर उठाया। भाजपा ने सभी के हित में इस मामले को उठाया। मैं शौरी के बयान से असहमत हूं।"
भाजपा प्रवक्ता ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि बिना नीलामी प्रक्रिया अपनाए एस बैंड स्पेक्ट्रम के आवंटन के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और एक निजी कम्पनी में करार हुआ।
प्रसाद ने कहा, "यदि प्रधानमंत्री को इस करार के बारे में जानकारी नहीं है तो मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि वह सरकार कैसे चलाते हैं।"
प्रसाद ने कहा, "यह एक घोटाला है। वर्ष 2005 में देवास मल्टीमीडिया को बैंड की मंजूरी देने से पहले कोई नीलामी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।"
यही नहीं प्रसाद ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण पर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2005 के करार में हुईं अनियमितताओं पर चव्हाण ने भी ध्यान नहीं दिया। चव्हाण उस समय प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्विट्जरलैंड के बैंकों में छुपा कर जमा किए गए काले धन को मुद्दे को भी नजरअंदाज कर रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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