दुनिया में हर दसवां आदमी मोटापे का शिकार
एक अध्ययन के मुताबिक 2008 में प्रत्येक 10 में से एक से ज्यादा लोग मोटापाग्रस्त थे। मोटापे के शिकार वयस्कों में 20.5 करोड़ पुरुष और 29.7 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। कई अमीर देशों में उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल सम्बंधी समस्याओं में कमी आई है लेकिन दुनियाभर में मोटापा बढ़ा है।
'द लैंसेट' जर्नल के मुताबिक अमेरिका व ब्रिटेन द्वारा संयुक्त रूप से किए गए इस अध्ययन में इंपीरियल कॉलेज और हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने वर्ष 1980 से 2008 के बीच लोगों के बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई से शरीर के कद और वजन का अनुपात बताया जाता है), रक्त चाप और कोलेस्ट्रॉल में हुए बदलावों के वैश्विक आंकड़े इकट्ठे किए।
आंकड़े बताते हैं कि 2008 में दुनियाभर में 9.8 प्रतिशत पुरुष और 7.9 प्रतिशत महिलाएं मोटापे के शिकार थे। उनका बीएमआई 30 से अधिक था। इसकी तुलना में 1980 में केवल 4.8 प्रतिशत पुरुष और 7.9 प्रतिशत महिलाएं मोटापाग्रस्त थीं।
प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों में दुनियाभर में सबसे ज्यादा मोटापा है। वहां बीएमआई का औसत 34 से 35 के बीच है। यह दक्षिणपूर्व एशिया और उप-सहारन अफ्रीका के कुछ देशों की तुलना में 70 प्रतिशत ज्यादा है।
शेष दुनिया में मोटापे का सम्बंध आय से रहा है और अधिक आय वाले देशों का बीएमआई अधिक है। साल 1980 और 2008 के बीच अमेरिका में बीएमआई सबसे ज्यादा बढ़ा है। न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया की महिलाओं और ब्रिटेन में पुरुषों में बीएमआई सबसे ज्यादा बढ़ा है।
अध्ययनकर्ता माजिद इजैति कहते हैं, "हमारे परिणाम बताते हैं कि ज्यादा वजन होना और मोटापा, उच्च रक्त चाप और कोलेस्ट्रॉल की अधिक मात्रा केवल पश्चिमी देशों या सम्पन्न राष्ट्रों की समस्या नहीं रह गई है।"
उनका कहना है, "इन समस्याओं की मौजूदगी निम्न व मध्यम आय वाले देशों में बढ़ गई है और इसी के साथ ये वैश्विक समस्याएं बन गई हैं।"
आबादी बढ़ने और बुढ़ापे सम्बंधी समस्याओं के चलते अनियंत्रित उच्च रक्तचाप के मरीजों की संख्या 1980 में जहां 60 करोड़ थी, वह 2008 में बढ़कर करीब एक अरब हो गई है।
अमीर देशों में अनियंत्रित उच्च रक्तचाप के मरीजों की संख्या में कमी आई है। आस्ट्रेलिया में महिलाओं और उत्तर अमेरिका में पुरुषों के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
उत्तर अमेरिका, आस्ट्रेलिया और यूरोप में रक्त कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी आई है जबकि पूर्वी, दक्षिणपूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र में यह स्तर बढ़ा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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