थॉमस पर लगे आरोपों पर समिति में हुई थी चर्चा : चिदम्बरम (लीड-1)

अपने मंत्रालय का जनवरी का रिपोर्ट कार्ड जारी करने के लिए यहां बुलाए संवाददाता सम्मेलन में चिदम्बरम ने यह कहकर आगे कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है।

चिदम्बरम ने कहा, "समिति का काफी समय केरल सरकार द्वारा मलेशिया से पामोलिन (ताड़ तेल) के आयात के मामले पर चर्चा में बीता। बैठक में स्वराज ने अपने विचार रखे थे।"

गौरतलब है कि केरल सरकार ने 1990 में मलेशिया से ताड़ तेल का आयात किया था। थॉमस उस समय राज्य के खाद्य सचिव थे।

चिदम्बरम ने कहा, "मामले पर अदालत में तत्परता से सुनवाई हो रही है और राजनीतिक नेताओं के बीच भी इस पर काफी चर्चा हो चुका है।"

ज्ञात हो कि सर्वोच्च न्यायालय उस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें थॉमस के सीवीसी के पद पर नियुक्ति पर सवाल उठाया गया है, क्योंकि उनका नाम ताड़ तेल आयात मामले में दाखिल प्रथम आरोप पत्र में अंकित है।

महान्यायवादी ने इससे पहले अदालत से कहा था कि थॉमस के खिलाफ मामले से सम्बंधित फाइल चयन समिति की बैठक में नहीं रखी गई थी।

चिदम्बरम ने कहा कि महान्यायवादी ने यह नहीं कहा था कि "बैठक में इस मामले पर चर्चा नहीं हुई थी।"

सीवीसी पद पर थॉमस की नियुक्ति उनके पक्ष में 2-1 के बहुमत से लिए गए फैसले पर तीन सदस्यीय समिति ने 4 सितम्बर, 2010 को की थी। उस वक्त प्रधानमंत्री और चिदम्बरम ने थॉमस की नियुक्ति का समर्थन किया था, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता सुषमा स्वराज ने इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।

यह पूछे जाने पर कि क्या थॉमस पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा था, गृह मंत्री ने कहा, "यह मामला चयन समिति के समक्ष लाया गया था।"

उन्होंने कहा, "यह भी बताया गया था कि 1999-2004 के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और 2004 से चल रही संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने थॉमस के खिलाफ अभियोग चलाने की अनुमति नहीं दी थी।"

इस ममले पर बाद में 20 सितम्बर, 2007 और अक्टूबर, 2008 में सुनवाई हुई थी। थॉमस एवं अन्य अधिकारी को 'सतर्कता चालान' दिया गया था।

दूसरी ओर, सीवीसी ने अडिग रुख अपनाते हुए सोमवार को कहा कि वह अभी तक अपने पद हैं। थॉमस ने यह बात संवाददाताओं द्वारा पूछे गए प्रश्नों का सीधा जवाब टालते हुए कही।

संवाददाताओं ने थॉमस के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के मद्देनजर उनके सीवीसी पद पर बने रहने के बारे में जानना चाहा था। थॉमस ने जवाब टालते हुए कहा कि वह अभी तक सीवीसी हैं। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए वह कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।

उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय थॉमस के खिलाफ एक स्वयंसेवी संगठन की ओर से दाखिल जनहित याचिका की सुनवाई कर रहा है। न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख तीन फरवरी तय की है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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