नेपाल में शव दफनाने के विवाद ने जोर पकड़ा
सुदेशना सरकार
काठमांडू, 31 जनवरी (आईएएनएस)। नेपाल में स्थित पवित्र पशुपतिनाथ मंदिर से सम्बद्ध जंगली क्षेत्र में गैर हिंदुओं के शवों को दफनाने पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुई लड़ाई ने सोमवार को जोर पकड़ लिया। इस कड़ी में नए प्रतिबंध के खिलाफ कई लोगों ने सोमवार को पशुपतिनाथ मंदिर के पास प्रदर्शन किया। दूसरी ओर संस्कृति मंत्री ने चेतावनी दी है कि इस प्रतिबंध को लागू करने के लिए सरकार कड़े कदम उठाएगी।
शनिवार से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन के आयोजकों में से एक, किरात याकथंग चुमलिंग के महासचिव योगराज वानेम ने कहा, "आज का विरोध प्रदर्शन सांकेतिक मात्र था।"
ज्ञात हो कि 17वीं सदी के हिंदू मंदिर, पशुपतिनाथ से सम्बद्ध जंगली भूमि में पुलिस द्वारा दो शवों को शनिवार को दफनाने से रोकने के बाद से यह विवाद शुरू हुआ है।
वानेम ने कहा, "हम आज प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल से मुलाकात करने जा रहे हैं। यदि वह हमारी शिकायतों को दूर नहीं कर पाए तो हम कड़े कदम उठाएंगे।"
पशुपतिनाथ का इलाका रविवार रात लगातार दूसरे दिन तनावपूर्ण बना रहा। दंगा पुलिस ने जसराम राय के शव को मंदिर से लगे श्लेषमंटक के जंगल में दफनाने से रोकने के बाद उनके परिजनों को हिरासत में ले लिया था।
राय (40), किरात समुदाय से थे। किरात समुदाय शिकार करने वाली एक ताकतवर जनजाति है, जो तिब्बत से पलायन कर नेपाल आई हुई है। इस समुदाय ने नेपाल पर 1,000 से अधिक वर्षो तक शासन किया था। इस समुदाय के 29 राजा हुए थे।
किरात समुदाय का रामायण और महाभारत में जिक्र है। यह समुदाय पारम्परिक रूप से जीववादी है और यह शव को दफन करने में विश्वास रखता है। लेकिन 2006 तक हिंदू राष्ट्र रहे नेपाल में अधिकांश गैर हिंदू समुदायों के लिए कब्रगाह उपलब्ध नहीं हैं।
पशुपतिनाथ से लगे जंगली इलाकों में केवल दशनामियों को शव दफनाने की अनुमति है। दशनामी एक हिंदू पंथ है। लेकिन चूंकि किरातों और ईसाइयों को कोई कब्रगाह आवंटित नहीं किया गया है, लिहाजा वे जंगल में ही शवों को दफन करते रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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