अमेरिका ने रेडियो टैगिंग को सही ठहराया, जांच जारी

अमेरिका का कहना है कि इस विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्रों का आव्रजन संदिग्ध है और इस कारण उन्हें स्वदेश वापस भेजा जा सकता है। अमेरिका के मुताबिक इस मामले में जांच जारी है।

अमेरिका ने विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्रों इसलिए रेडियो कॉलर पहनाया है क्योंकि वह उनसे लगातार सम्पर्क बनाए रखना चाहता है लेकिन भारतीय विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा ने रविवार को उसके इस कदम को 'अमानवीय' करार दिया था।

कृष्णा की इस आपत्ति के बाद भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने बयान में कहा, "टखने के ऊपर लगाए जाने वाले जानकारी देने वाले यंत्र का उपयोग आम बात है। अमेरिका में इसका खुलकर उपयोग होता है। जांच की प्रक्रिया के दौरान ऐसा किया जाता है। जिन लोगों के पैरों में इसे लगाया गया है, उन्हें अपराधी नहीं माना जा सकता।"

"ट्राई-वैली विश्वविद्यालय मामले में हमारी जांच जारी है और यही कारण है कि उसमें पढ़ने वाले कुछ छात्रों के पैरों में यह यंत्र लगाया गया है। यह यंत्र रेडियो सिग्नल प्रसारित करता है। इसे पहनकर कहीं भी आया-जाया जा सकता है। हमने इसे जांच के दौरान आरोपियों को बिना मतलब के हिरासत में लेने से बचाने के लिए सकारात्मक रास्ते के रूप में चुना है।"

ट्राई-वैली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले लगभग 90 फीसदी छात्र, जिनकी सही संख्या 1555 बताई गई है, भारत से सम्बंध रखते हैं। इनमें से अधिकांश छात्र आंध्र प्रदेश के हैं। विश्वविद्यालय के बंद होने के बाद इन पर छात्रों के लिए जारी वीजा को बेचने का आरोप है।

अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि इस मामले में अमेरिकी गृह विभाग गंभीरता बरत रहा है और साथ ही साथ इसे लेकर भारत सरकार के साथ वह लगताार सम्पर्क बनाए हुए है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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