ऊर्जा बचाने वाले बल्ब से स्तन कैंसर का खतरा
इजरायल के हफीफा विश्वविद्यालय के जीवविज्ञान के प्रोफेसर अब्राहम हाइम का कहना है कि कॉम्पैक्ट फ्लोरेसेंट लैम्प (सीएफएल) से निकलने वाली नीले रंग की रोशनी काफी हद तक दिन में होने वाली रोशनी जैसी होती है।
सीएफएल का नुकसान यह है कि इससे शरीर में मेलाटोनीन नाम के हारमोन का बनना काफी हद तक प्रभावित होता है। इस कारण सीएफएल पीले रंग की रोशनी देने वाले पारंपरिक फिलामेंट वाले बल्ब की तुलना में स्तन कैंसर को ज्यादा तेजी से बुलावा देता है।
हाइम की यह रिपोर्ट 'क्रोनोबॉयलॉजी इंटरनेशनल' नाम के जर्नल में प्रकाशित हुई है। इसमें यह भी लिखा है कि मेलाटोनीन को स्तन तथा प्रोस्टेट कैंसर से बचाने वाला हारमोन माना जाता है। यह 24 घंटे मस्तिस्क के पीइनीयल ग्लैंड में तैयार होता रहता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जो महिलाएं रात में बल्ब जलाकर सो जाया करती हैं, उनमें स्तन कैंसर का खतरा 22 फीसदी तक बढ़ जाता है। इस लिहाज से रात में रोशनी के बगैर सोना महिलाओं के लिए ज्यादा सुरक्षित है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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