मिस्र में फंसे नागरिकों को बाहर निकालेगा न्यूजीलैंड
वेलिंग्टन। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री जॉन की ने कहा है कि सरकार मिस्र के हालात बिगड़ने पर वहां मौजूद नागरिकों को स्वदेश लाने के लिए सेना के विमान भेजने पर विचार कर सकती है।मिस्र के कई शहरों में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक 100 लोग मारे गए हैं और हजारों घायल हुए हैं। काहिरा में जारी विरोध प्रदर्शन के कारण न्यूजीलैंड के दूतावास का कार्यालय नहीं खुल सका है। की ने कहा कि सरकार म्रिस में मौजूद न्यूजीलैंड के नागरिकों से मिस्र छोड़ देने का अनुरोध कर रही है और हरसम्भव सहायता मुहैया करवा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार जरूरत पड़ने पर सेना के विमानों का इस्तेमाल कर सकती है। हालांकि इस बारे में अभी तक फैसला नहीं किया गया है।
मिस्र में जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान न्यूजीलैंड के दूतावास की इमारत को नुकसान पहुंचा है और वहां बिजली नहीं है। कर्मचारियों को राजदूत रीनी विल्सन के घर से काम करना पड़ रहा है। विल्सन ने कहा है कि मिस्र में जारी विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए उन्होंने सिनाई प्रायद्वीप पर तैनात न्यूजीलैंड की सेना को बैरकों में बुला लिया है।
मिस्र और इजरायल के बीच 1973 के समझौते के मुताबिक वहां अंतर्राष्ट्रीय सेना तैनात है जिनमें 28 सैनिक न्यूजीलैंड के हैं।इस बीच न्यूजीलैंड के विदेश एवं वाणिज्य मंत्रालय ने नागरिकों को मिस्र न जाने की सलाह दी है।












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