पोस्को परियोजना को मिली सशर्त मंजूरी (लीड-1)
नई दिल्ली, 31 जनवरी (आईएएनएस)। पर्यावरण मंत्रालय ने सोमवार को दक्षिण कोरिया की इस्पात कम्पनी पोस्को की उड़ीसा में इस्पात संयंत्र लगाने की योजना को सशर्त मंजूरी दे दी। योजना के तहत पोस्को उड़ीसा में 12 अरब डॉलर का निवेश करेगी, जो देश में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश होगा।
योजना के तहत कम्पनी स्टील, खनन और बंदरगाह परियोजना में निवेश करेगी। तीनों परियोजनाओं को अलग-अलग मंजूरी दी जानी थी। इसके अलावा कम्पनी स्टील परियोजना के लिए बिजली आपूर्ति हेतु एक कैप्टिव बिजली संयंत्र भी लगाएगी।
मंत्रालय ने स्टील-सह-कैप्टिव बिजली संयंत्र को पर्यावरण मंजूरी देने के लिए इस पर 28 अतिरिक्त शर्ते लागू कर दीं। साथ ही राज्य के छोटे कैप्टिव बंदरगाह को पर्यावरण मंजूरी देते हुए इस पर 32 अतिरिक्त शर्तें लगा दीं।
उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर से 100 किलोमीटर दूर जगतसिंहपुर जिले की परियोजना के लिए भूमि हस्तांतरण के मामले पर मंत्रालय ने राज्य सरकार को क्षेत्र के वनवासियों को एक सम्पूर्ण पैकेज देने के लिए कहा है।
पर्यावरण एवं वन मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि निश्चित रूप से पोस्को जैसी परियोजना का देश के लिए आर्थिक, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक महत्व है, लेकिन पर्यावरण और वन कानूनों को भी लागू करना जरूरी है।
पर्यावरण मंत्रालय ने पर्यावरण एवं वन कानूनों के उल्लंघन के कारण इसकी मंजूरी पर रोक लगा रखी थी।
पोस्को को अपनी परियोजना के लिए 4,004 एकड़ भूखंड की जरूरत है, जिसमें 2,900 एकड़ चिह्न्ति भूखंड वन क्षेत्र में पड़ता है।
स्थानीय निवासी पान की खेती उजड़ जाने और विस्थापन होने की डर से परियोजना का विरोध कर रहे हैं।
पोस्को और सरकार का कहना है कि परियोजना से क्षेत्र में समृद्धि आएगी।
नेशनल फोरम ऑफ फोरेस्ट पीपुल एंड फोरेस्ट वर्कर्स (एनएफएफपीएफडब्ल्यू) ने आरोप लगाया है कि पोस्को की पूरी परियोजना एक दूसरे से जूड़ी है और एक ही स्थान पर अवस्थित है। इसके बावजूद उसने जानबूझकर परियोजना को तीन क्षेत्रों स्टील संयंत्र, कैप्टिव बंदरगाह और बिजली कम्प्लेक्स में बांट दिया है और तीनों के लिए अलग-अलग मंजूरी की मांग की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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