'मिस्र में बदलावों का पाकिस्तान पर असर होगा'
इसके साथ ही अखबार ने कहा है कि इन बदलावों से इस बात का सबक लेना चाहिए कि जब शासक जनता की आवाज अनसुनी कर देते हैं और उनकी इच्छाओं पर ध्यान नहीं देते तो उसका परिणाम क्या होता है।
समाचार पत्र 'न्यूज इंटरनेशनल' ने अपनी सम्पादकीय में लिखा है कि म्रिस्र में घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं, इतनी तेजी के साथ कि वैश्विक राजनयिक समुदाय उस पर नियंत्रण नहीं कर पा रहा है।
सम्पादकीय में कहा गया है कि राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक द्वारा प्रदर्शनकारियों के गुस्से को शांत करने के लिए उठाए गए कदम बेकार साबित हुए हैं।
सम्पादकीय में लिखा गया है कि पुलिस ने लगभग हर जगह मोर्चा छोड़ दिया है। अखबार ने कहा है, "सेना एक भूमिका अदा करते हुए नजर आती है जो कि पूरी तरह आक्रामक नहीं है, लेकिन वह सक्रिय रूप से प्रदर्शनकारियों के पक्ष में भी नहीं है।"
सम्पादकीय में कहा गया है, "अभी तक विरोध प्रदर्शन धार्मिक उन्माद के बदले धर्मनिरपेक्ष रहे हैं।"
सम्पादकीय में आगे कहा गया है, "इस बात में अब कोई संदेह नहीं दिखाई देता कि राष्ट्रपति मुबारक के दिन लद चुके हैं। राजनीतिक रूप से सेना, 1952 से ही हर शासन की जमानतदार रही है और सेना के पूर्व प्रमुख सदस्यों को प्रत्येक प्रशासन में स्थान मिला है।"
सम्पादकीय में लिखा है मिस्र, अरब दुनिया का एक प्रमुख देश है, और वह अरब जगत में बदलाव का अगुआ है। अखबार ने कहा है, "उन बदलावों के परिणाम का निश्चितरूप से हम पर असर पड़ेगा, और यह इस बात का एक सबक है कि जब शासक जनता की आवाज अनसुनी कर देते हैं और उनकी इच्छाओं पर ध्यान नहीं देते तो उसका परिणाम क्या होता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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