देश में छद्म लोकतंत्र: प्रशांत भूषण

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण का कहना है कि देश में कॉरपोरेट माफिया भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है। प्रशांत ने कहा कि "भारत माफिया राज की ओर बढ़ रहा है" और कॉरपोरेट घराने कानून से परे हो गए हैं।

प्रशांत ने कहा, "कॉरपोरेट माफिया का सत्ता एवं शासन के सभी संस्थानों पर नियंत्रण है, चाहे वह राजनीतिज्ञ हों, नौकरशाह हों, पुलिस और एक हद तक न्यायपालिका भी।" प्रशांत ने कहा, "कॉरपोरेट घराने भयावह तरीके से विशाल हो गए हैं और कानून की अनदेखी करती हैं। वे कानून और नीतियां बनाते हैं और अपने निर्णय लेते हैं, न्यायिक निर्णय भी। अक्सर वे इस बात का भी निर्धारण करते हैं कि मीडिया क्या प्रकाशित करेगा और क्या नहीं। "

पूर्व कानून मंत्री एवं न्यायविद शांति भूषण के बेटे प्रशांत ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ और लोकतांत्रिक संस्थानों को मुक्त कराने के लिए कोई भी लड़ाई पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए। प्रशांत भूषण ने कहा, "आज की स्थिति 1970 के दशक के प्रारम्भ से ज्यादा बुरी है। उन दिनों सभी संस्थानों पर कॉरपोरेट माफिया का नियंत्रण नहीं था। वह ऐसी स्थिति थी जिसमें एक ताकतवर प्रधानमंत्री ने अस्थायी तौर पर लोकतंत्र को ठप्प कर दिया था। आज कॉरपोरेट माफिया जवाबदेह और अधिक खतरनाक है।"

उन्होंने कहा, "यह व्यवस्था बहुत बुरी है। जब यह स्पष्ट हो चुका है कि लोकतंत्र के अधिकांश संस्थान ध्वस्त या निष्क्रिय हो गए हैं, तो ऐसे में सक्रिय लोकतंत्र का भ्रम बनाए रखने का कोई अर्थ नहीं है। हमें देश में सही लोकतंत्र बहाल करने की आवश्यकता है, न कि लोकतंत्र का भ्रम बनाए रखने की।"

अधिवक्ता प्रशांत ने कहा कि भारतीय शासन को कॉरपोरेट माफिया से बचाने का उपाय केवल पारदर्शिता और राज्य तंत्र की कार्यप्रणाली के बारे में जानने का जनता का अधिकार है। उन्होंने कहा, "जबतक हम जाग नहीं जाते और सार्वजनिक मुद्दों और मामलों में रुचि लेना शुरू नहीं कर देते, तब तक समझिए हम गर्त की ओर बढ़ रहे हैं।"

ज्ञात हो कि प्रशांत ने ही सर्वोच्च न्यायालय को इस बात के लिए राजी किया था कि वह दूरसंचार कम्पनियों को 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में हुए घोटाले की सीबीआई (केद्रीय जांच ब्यूरो) जांच की निगरानी करे।

प्रशांत ने केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) पी.जे.थॉमस के खिलाफ आरोपों व भ्रष्टाचार को लेकर अपनी लड़ाई के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत बहुत ही गम्भीर स्थिति में है और सबसे बड़ा खतरा भ्रष्टाचार से है, जो कि राज्य की कार्यप्रणाली के हर प्रमुख हिस्से में व्याप्त हो चुका है। प्रशांत ने सवाल किया कि आखिर अमेरिका के साथ परमाणु समझौते पर या लोकपाल विधेयक पर देश में जनमत संग्रह कराने से सरकार को किसने रोका।

थॉमस की नियुक्ति पर अपने विरोध पर भूषण ने कहा, "मुझे बताया गया कि वह एक ईमानदार हैं। वह खुद पैसे नहीं लेते। लेकिन उन्होंने दूरसंचार मंत्री ए.राजा और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री के.करुणाकरण जैसे अपने से ऊपर के लोगों को भ्रष्ट तरीके से पैसे बनाने की छूट दी और उसके बाद ऐसी व्यवस्था बनाई कि सत्ता में भ्रष्ट लोग बने रहे।"

भूषण ने कहा, "भ्रष्टाचार निरोधी वॉचडाग के रूप में हमें एक ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जो न केवल भ्रष्टाचार का विरोध करे, बल्कि भ्रष्टाचार को रोकने और भ्रष्ट लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में तत्पर रहे।" प्रशांत ने सीवीसी की नियुक्ति प्रक्रिया को दोषपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, "नियुक्ति ऐसे लोगों (राजनीतिज्ञों)द्वारा की गई है, जिनका एक बहुत ही गम्भीर निहित स्वार्थ है, क्योंकि उन्हें इस बात का भय रहा है कि सीवीसी जांच का सामना उन्हें भी करना पड़ सकता है।"

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