मिस्र में प्रदर्शन जारी, ओबामा ने की अंतर्राष्ट्रीय नेताओं से चर्चा (लीड-1)
काहिरा, 31 जनवरी (आईएएनएस)। मिस्र में सोमवार को भी सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी रहे। राजधानी काहिरा में सुबह राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के इस्तीफे की मांग को लेकर लोगों ने कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए प्रदर्शन किया। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने यहां के हालात के बारे में तुर्की, इजरायल, सऊदी अरब और ब्रिटेन के नेताओं से चर्चा की है।
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे मिस्र के असंतुष्ट नेता मोहम्मद अल बरदई ने इससे पहले रविवार को हजारों प्रदर्शकारियों से वादा किया कि उनके प्रदर्शनों से देश में बदलाव जरूर आएगा। मध्य काहिरा के तहरीर स्क्वे यर में प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए नोबेल शांति पुरस्कार विजेता अल बरदई ने कहा, "हमने आज जो शुरुआत की है उससे पीछे नहीं हट सकते।" उन्होंने इसे 'ऐतिहासिक दिवस' करार दिया।
सरकार द्वारा कर्फ्यू और देश में फोन और इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद सरकार विरोधी प्रदर्शन में शामिल सैकड़ों लोग सोमवार सुबह तहरीर स्क्वे यर में एकत्र हुए। प्रदर्शन में शमिल लोगों का कहना है कि वे तब तक वापस नहीं जाएंगे जब तक मुबारक अपना इस्तीफा नहीं दे देते।
अल बरदई ने कहा, "मिस्र में हम नए युग की शुरुआत कर रहे हैं।" अल बरदई विपक्ष को संगठित करने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन लम्बे समय तक देश से बाहर रहने के कारण उनको विश्वास हासिल करने में दिक्कतें आ रही हैं।
मिस्र के सबसे बड़े विपक्षी समूह मुस्लिम ब्रदरहुड के प्रवक्ता गमाल नासिर ने कहा कि मुबारक और उनकी नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी को अलग रखते हुए एक सर्वसम्मत सरकार के गठन के लिए उनका संगठन अल बरदई और अन्य पक्षों से लगातार बातचीत कर रहा है।
इस बीच विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई जगहों पर लूटपाट की घटनाएं भी सामने आई हैं। कई बड़े शहरों में लोगों ने अपनी सम्पत्तियों की रक्षा के लिए 'नेवरहुड वॉच ग्रुप' बनाया है। इस तरह के समूह बनने से लूटपाट की घटनाओं में कमी आई है। ऐसी भी खबरें हैं कि प्रदर्शनों का फायदा उठाते हुए हजारों कैदी जेलों से फरार हो गए हैं।
गौरतलब है कि सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अभी तक कम से कम 150 लोग मारे जा चुके हैं।
इस बीच ओबामा ने मिस्र की वर्तमान स्थिति को लेकर तुर्की, इजरायल, सऊदी अरब और ब्रिटेन के नेताओं से बात की है। लेकिन अल बरदई का कहना है कि अमेरिका, मिस्र में होने वाले बदलाव में सहयोग नहीं कर रहा है जिससे उसकी विश्वसनीयता समाप्त हो रही है।
ओबामा ने रविवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन से बात की। इससे पहले शनिवार को उन्होंने तुर्की के प्रधानमंत्री रेसेप तय्यीप एडरेगन, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहु और सऊदी अरब के राजा अब्दुल्ला से बात की थी। बातचीत के दौरान ओबामा ने हिंसा के खिलाफ होने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
व्हाइट हाऊस से जारी एक बयान के मुताबिक ओबामा ने मिस्र की जनता की इच्छाओं के अनुसार व्यवस्थित तरीके से सरकार में परिवर्तन की बात कही है।
इस बीच, पाकिस्तान सरकार ने कहा है कि मिस्र के घटनाक्रमों पर नजर रखी जा रही है और हालात ज्यादा बिगड़ने पर वहां से पाकिस्तानी नागरिकों को निकाल लिया जाएगा।
'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' ने सोमवार को खबर दी कि पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि मिस्र में मौजूद करीब 150 परिवारों को स्वदेश कब लाया जाएगा। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल बासित ने रविवार को कहा, "हम काहिरा में अपने दूतावास के साथ सम्पर्क में हैं। हम वहां के घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं।"
उधर, न्यूजीलैंड ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ सुर में सुर मिलाते हुए सोमवार को मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक से देश में सत्ता परिवर्तन की जनता की मांगों का सम्मान करने को कहा।
समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री मरे मैक्कु ली ने कहा है, "मिस्र की जनता स्वतंत्रता और बेहतर आर्थिक परिस्थितियों के साथ व्यापक आधार वाली सरकार चाहती है और उसकी इच्छा का मिस्र के नेताओं को सम्मान करना चाहिए।"
मरे ने कहा कि मिस्र अरब जगत का केंद्र है और लम्बे अर्से से संयमशील रहा है और क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देता आया है। अब काहिरा की गलियों में भी सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को उसी संयम का प्रदर्शन करने की जरूरत है।
इस प्रधानमंत्री जॉन के ने कहा है कि सरकार मिस्र के हालात बिगड़ने पर वहां मौजूद नागरिकों को स्वदेश लाने के लिए सेना का विमान भेज सकती है। मिस्र में जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान न्यूजीलैंड के दूतावास की इमारत को नुकसान पहुंचा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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