विरोध की आंधी यमन पहुँची

यमन मे ट्यूनिशिया की तर्ज़ पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं
यमन में हज़ारों लोग राष्ट्रपति अब्दुल्ला सालेह के इस्तीफ़े की मांग लेकर राजधानी सना में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
सालेह 30 वर्ष से वहां के शासक है और रिपोर्टों के अनुसार विरोध प्रदर्शन सना विश्वविद्यालय समेत कम से कम चार जगहों पर हुए हैं.
प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति को अपदस्त किए जाने का उन्होंने हवाला दिया.
प्रदर्शन का आयोजन करने वालों ने छात्रों और नागरिक सहायता समूहों से आह्वान किया है कि वो भ्रष्टाचार और आर्थिक नीतियों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएं.
यमन की आबादी मे बड़ी संख्या युवा वर्ग की है और वे बढ़ती ग़रीबी की शिकायत करते हैं, साथ ही देश में राजनीतिक स्वतंत्रता का अभाव भी उन्हें खल रहा है.
यमन के 40 प्रतिशत से ज़्यादा लोगों की दिहाड़ी दो डॉलर या लगभग 90 रुपए है.
देश के दक्षिण में पृथकतावादी आंदोलन सिर उठा रहा है वही उत्तर में शिया छापामार आंदोलन कर रहे हैं.
ये भी डर है कि यमन अल क़ायदा का गढ़ बनता जा रहा है और यहां के बेरोज़गार युवा इस्लामी चरमपंथियों के लिए संभावित रंगरुट हो सकते हैं.
यहां बृहस्पतिवार को हुए बड़े प्रदर्शनों के पहले छुटपुट विरोध हुए थे.
शनिवार को सना विश्वविद्यालय के छात्रों ने प्रदर्शन किए. उनमें से कुछ राष्ट्रपति सालेह को हटाने की मांग कर रहे थे तो कुछ उनके बने रहने के लिए आवाज़ उठा रहे थे.
सप्ताहांत में यमनी अधिकारियों ने एक प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता तवाकुल करमन को सरकार विरोधी प्रदर्शनों के लिए गिरफ़्तार किया गया, उसके बाद सना में और प्रदर्शन हुए.
अपनी रिहाई के बाद उन्होंने सीएनएन को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि उनके देश में विरोध ट्यूनीशिया से प्रभावित होकर किए जा रहे हैं.
ट्यूनीशिया में विरोध प्रदर्शनों ने राष्ट्रपति ज़ैन अल अबिदीन बेन अली का 23 साल का शासन समाप्त किया और अल्जीरिया व मिस्र के लोगों को अपनी अपनी सरकारों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने का हौसला दिया.


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