थॉमस की नियुक्ति प्रक्रिया पर न्यायालय ने उठाए सवाल (लीड-1)

न्यायालय ने पूछा कि क्या थॉमस के खिलाफ लम्बित आरोप पत्र और ताड़ तेल आयात मामलों में मुकदमा चलाने के लिए केरल सरकार द्वारा दी गई मंजूरी की जानकारी उनके चयन के लिए गठित उच्च अधिकार प्राप्त समिति को दी गई थी या नहीं।

न्यायालय ने पूछा कि क्या इससे थॉमस के चयन की प्रक्रिया दूषित नहीं हुई।

न्यायालय ने पूछा, "आपराधिक मामले में थॉमस के खिलाफ आरोप पत्र लंबित होने अथवा केरल सरकार द्वारा उन पर अभियोग चालने की दी गई मंजूरी के सवाल में हम नहीं जाना चाहते। हमें बस इतना जानना है कि क्या इन सभी सूचनाओं को चयन समिति के समक्ष रखा गया था।"

सर्वोच्च न्यायालय की पीठ के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति एस.एच. कपाड़िया, न्यायमूर्ति के.एस. राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार ने पूछा, "समिति के समक्ष इस तथ्य का खुलासा न करने की मंशा क्या थी? क्या यह सीवीसी की नियुक्ति को लेकर निर्णय लेने की पूरी प्रक्रिया को दूषित नहीं करती?"

सीवीसी के चयन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कहा कि मामले की पात्रता में जाने से पहले वह जानना चाहती है कि नियुक्ति की प्रक्रिया में सही प्रक्रिया अपनाई गई कि नहीं।

जिस उच्च अधिकार प्राप्त समिति ने थॉमस की नियुक्ति की उसमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदम्बरम के साथ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज शामिल थीं।

चयन समिति ने बहुमत के द्वारा स्वराज की आपत्ति को नजरअंदाज कर दिया था और थॉमस को सीवीसी के रूप में नियुक्त कर दिया था।

महान्यायवादी जी.वाहनवती ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया, "थॉमस के खिलाफ लम्बित मामले की सच्चाई चयन समिति के समक्ष नहीं पेश की गई थी। चयन समिति के समक्ष जिस चीज को पेश किया जाना आवश्यक था, वह था पैनल में शामिल अधिकारी का बायोडाटा।"

इस पर न्यायालय ने पूछा, "पी.जे.थॉमस के बारे में प्रासंगिक तथ्यों की जानकारी चयन समिति को न देने का प्रभाव क्या पड़ा। क्या इससे पूरी चयन प्रकिया दूषित नहीं हुई।"

अदालत ने पूछा कि क्या सीवीसी के पद के लिए तीन ही योग्य उम्मीदवार थे या अन्य भी थे जिन्हें छांट दिया गया। नियुक्ति की पात्रता का शर्ते क्या थीं।

न्यायालय ने यह भी जानना चाहा कि क्या सीवीसी का पद संवैधानिक अथवा कानूनी है और सीवीसी द्वारा कार्यालय की जिम्मादारी उठाने से पहले राष्ट्रपति द्वारा दिलाए गए शपथ का परिणाम क्या हुआ।

अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या पैनल के दो अन्य अधिकारी भी पी.जे.थॉमस की तरह आरोपित थे, और फिर सीवीसी के रूप में चयन करने के लिए थॉमस को ही क्यों महत्व दिया गया।

याचिकाकर्ता 'सेंटर फॉर पब्लिक इंटेरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल)' की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने न्यायालय से सीबीसी की नियुक्ति के सम्बंध में दिए गए अपने फैसले की समीक्षा करने का अनुरोध किया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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