'अमेरिकी अनुरोध पर फिल्ीास्तीन ने रोकी थी गाजा युद्ध की रिपोर्ट'

दक्षिण अफ्रीकी न्यायाधीश, रिचर्ड गोल्डस्टोन के नेतृत्व वाले तथ्यान्वेषी मिशन की रिपोर्ट में कहा गया था कि इजरायल के अलावा हमास ने भी 2008-09 के जाड़े में गाजा में तीन सप्ताह तक चले विनाशकारी हमले के दौरान युद्ध अपराधों को अंजाम दिया था।

अल-जजीरा ने अज्ञात सूत्रों से हासिल हुए इजरायल-फिलीस्तीन विवाद से सम्बंधित 1,684 गोपनीय दस्तावेजों से इन चुनिंदा जानकारियों को प्रकाशित किया है।

फिलीस्तीन के मुख्य वार्ताकार साएब अरकात ने बुधवार को स्वीकार किया कि कुछ दस्तावेज प्रामाणिक हैं। इजरायली और अमेरिकी अधिकारियों की बैठकों के इस ब्यौरे में अरकात का सर्वाधिक जिक्र है।

अरकात ने मिस्र से लौटने के बाद रामल्ला से बीबीसी के साथ साक्षात्कार में कहा, "पहला यह कि इसमें कुछ बातें सच हैं। दूसरा यह कि कुछ बातों में आधी सच्चाई है। तीसरा यह कि यह पूरी तरह मनगढ़ंत और कपोल कल्पित है।"

एरकाट ने कहा, "ये आधिकारिक दस्तावेज नहीं हैं। इजरायल के साथ हमारा कोई समझौता नहीं हुआ है। ये सब टिप्पणियां हैं।" उन्होंने कहा कि इनमें से कुछ सामग्रियां गलत हो सकती हैं।

इन टिप्पणियों व दस्तावेजों को फिलीस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) के वार्ता मामलों के अपने विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी द्वारा लीक किए जाने को लेकर लगाए जा रहे कयासों पर एरकाट अरकात ने कहा, "यदि ये दस्तावेज बाहर आए हैं, इस कार्यालय से चुराए गए हैं, तो इसकी जिम्मेदारी अकेले सिर्फ मेरी होगी।"

अरकात ने कहा कि सीमा और शरणार्थियों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर हुई चर्चाओं के विवरण वाले दस्तावेज चकित करने वाले नहीं हैं और उनमें सार्वजनिक जानकारियां शामिल हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता पी.जे.क्राउले ने बुधवार को वाशिंगटन में संवाददाताओं से कहा कि वह लीक दस्तावेजों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन उन्होंने दृढ़ता के साथ कहा कि अमेरिका का मानना है कि यह रिपोर्ट अनुचित है और इससे शांति वार्ता में प्रगति अवरुद्ध हो सकती है।

क्राउले ने कहा, "उस समय हमारा प्रचलित मत था कि हम नहीं समझते थे कि गोल्डस्टोन की रिपोर्ट में मुद्दों पर विचार करने के लिए मानवाधिकार परिषद उचित मंच था।"

ज्ञात हो कि अल-जजीरा ने बुधवार को कहा था कि बुधवार को प्रकाशित फिलीस्तीनी दस्तावेजों से यह बात उजागर हुई कि पीए ने वार्ता पर अमेरिका के अनुकूल आश्वासनों की एवज में जाहिर तौर पर गाजा युद्ध के पीड़ितों की सम्भावित जीत को एक तरह से कुर्बान कर दिया था।

फिलीस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने 2009 के अंत में स्वीकार किया था कि गोल्डस्टोन की रिपोर्ट के समर्थन के लिए संयुक्त राष्ट्र में मतदान में देरी करने के लिए उन्होंने कहा था। और इस स्वीकारोक्ति के परिणाम स्वरूप अब्बास को घरेलू स्तर पर अभूतपूर्व आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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