लाल चौक में जन-जीवन सामान्य
कड़ाके की सर्दी के बावजूद दुकानें सुबह खुल गईं और सड़कों पर यातायात बहाल हो गया। परिणामस्वरूप कार्यालयी कर्मचारी और व्यापारी अपने-अपने कार्यस्थलों तक पहुंचे।
मुहम्मद रमजान (35) नामक एक सरकारी कर्मचारी ने कहा, "इस बात पर विश्वास कर पाना कठिन है कि यह वही स्थान है, जहां बुधवार को पूरे दिन सन्नाटा पसरा हुआ था।"
ज्ञात हो कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लाल चौक पर 26 जनवरी को राष्ट्र ध्वज फहराने की घोषणा की थी।
भाजपा की इस योजना के प्रतिक्रियास्वरूप अलगाववादी संगठन, जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) ने भी उसी दिन लाल चौक के लिए एक जवाबी जुलूस निकालने की घोषणा की थी।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदम्बरम को राय में लेकर घाटी के वातावरण को सामान्य बनाए रखने के लिए भाजपा और जेकेएलएफ, दोनों को रोकने का निर्णय लिया।
ज्ञात हो कि कश्मीर घाटी पिछली गर्मियों हिंसा की आग में झुलसती रही। इस हिंसा में 110 लोग मारे गए थे और प्रदर्शनकारियों और सु़रक्षा बलों के बीच चार महीने से अधिक समय तक संघर्ष चलता रहा। इसके परिणामस्वरूप पर्यटन आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा था।
लाल चौक से लगे अबी बाजार मुहल्ले के निवासी मंजूर अहमद (36) ने कहा, "लाल चौक का राजनीतिक उथल-पुथल का अपना इतिहास है। अलगाववादी अभी तक कहते हैं कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसी लाल चौक पर कश्मीरियों से जनमत संग्रह का वादा किया था।"
अहमद ने कहा, "वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने भारी सुरक्षा के बीच 1992 में लाल चौक के लिए फ्लैग मार्च का नेतृत्व किया था।"
अहमद ने कहा, "पिछले वर्ष अलगाववादियों ने लाल चौक के लिए कई जुलूसों की घोषणा की थी और उनमें से एक जुलूस के दौरान सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक सम्पत्तियों को आग के हवाले किया गया था।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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