मिर्चपुर हिंसा : दलित परिवारों ने गांव छोड़ा
मिर्चपुर, 27 जनवरी (आईएएनएस)। हरियाणा में पिछले साल जातीय हिंसा की चपेट में आने वाले हिसार जिले के मिर्चपुर में पिछले 15 दिनों में करीब दर्जनों दलित परिवारों ने गांव छोड़ दिया है। पिछले साल की हिंसा में एक बुजुर्ग दलित और उनकी विकलांग बेटी की मौत हो गई थी।
राज्य सरकार और पुलिस के सुरक्षा मुहैया कराने के आश्वासन के बावूजद जाट समुदाय के लोगों की हिंसा से भय बढ़ने की वजह से दलित परिवार सहमे हुए हैं।
गौरतलब है कि जाट समुदाय के लोगों ने 21 अप्रैल 2010 की जातीय हिंसा मामले में गिरफ्तार युवकों की रिहाई की मांग को लेकर पिछले 12 दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया था।
मिर्चपुर गांव के एक दलित निवासी गुलाब सिंह ने आईएएनएस को बताया, "राज्य सरकार पिछले साल अप्रैल में दलितों परिवारों पर हमले के दोषियों को सजा देने में नाकाम रही है। सरकार वोट बैंक की राजनीति कर रही है और जाट समुदाय के लोगों को दंडित नहीं करना चाहती है।"
मिर्चपुर गांव में आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े करीब 300 दलित परिवार रहते हैं।
सिंह ने कहा, "हमारा सरकार और पुलिस से विश्वास उठ गया है। इसलिए मिर्चपुर में ठहरने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है। हम हरियाणा में कहीं भी रहना नहीं चाहते हैं। सरकार से अपील है वह राज्य के बाहर कहीं हमारा पुनर्वास कराए।"
मिर्चपुर गांव पिछले साल उस समय सुर्खियों में आया था जब जाट समुदाय के कुछ लोगों ने दलित परिवारों के मकानों को आग लगा दी थी।
इसमें 70 वर्षीय दलित बुजुर्ग और उसकी 18 वर्षीय विकलांग बेटी की मौत हो गई थी। साथ ही कम से कम 18 मकान जलकर नष्ट हो गए थे। इसकी वजह से करीब 150 दलित परिवार गांव छोड़कर चले गए थे।
मिर्चपुर गांव से बाहर रह रहीं एक अन्य दलित महिला शीला ने बताया, "हमें जाट समुदाय से अभी भी खतरा बना हुआ है। वे मामले को वापस लेने के लिए हम पर दबाव बना रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "सरकार सुरक्षा के पर्याप्त बन्दोस्त नहीं कर रही है। लिहाजा हमने हिसार जिले को छोड़ने का फैसला किया है। बच्चे जाट समुदाय के सहयोगियों के साथ काम करने से भी डरते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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