हिरासत में मौत मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं
गौरतलब है कि चित्रकूट जनपद के रैपुरा थाने की पुलिस ने भौंरी गांव के युवक अनुपम भार्गव को 18 जुलाई, 2010 को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। दो दिन बाद उसका शव थाने से कुछ दूर एक पेड़ से लटका पाया गया। ग्रामीणों के दबाव पर पुलिस अधीक्षक ने थानाध्यक्ष धर्मेद्र सिंह, उपनिरीक्षक ओमप्रकाश शर्मा, सिपाही राजदेव सरोज समेत पांच के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराकर आरोपियों के निलम्बन की कार्रवाई की थी।
इस मामले में अब तक कई विवेचक बदले जा चुके हैं, मगर किसी ने अदालत में आरोप पत्र तक दाखिल नहीं किया। मृतक के भाई अवधविहारी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि 'पुलिस अधिकारी आरोपियों को बचाने का षड्यंत्र कर रहे हैं और सुलह का दबाव बनाया जा रहा है। वे भयभीत होकर गांव छोड़ने पर विचार कर रहे हैं।'
चित्रकूट के पुलिस अधीक्षक डा. तहसीलदार सिंह ने बुधवार को बताया, "मृत युवक का बड़ा भाई गंगा प्रसाद हत्या के एक मामले में वांछित है, उसी की तलाश में उसे हिरासत में लिया गया था। थाने से भागकर उसने पेड़ से लटककर आत्महत्या की थी। अब तक की विवेचना में यही तथ्य उजागर हुआ है, इसलिए गिरफ्तारी का सवाल ही नहीं है।"
उल्लेखनीय तीन चिकित्सकों के पैनल में हुए पोस्टमार्टम में मृत युवक के बाह्य अंगों पर सात चोंटे व ब्रेन हैमरेज होना पाया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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