पुलिस पदक के लिए डीआईजी के चयन का विरोध

कानपुर के दिव्या मामले में लापरवाही बरतने और दोषियों को बचाने के संगीन आरोपों के बाद तत्कालीन डीआईजी प्रेम प्रकाश के खिलाफ राज्य सरकार ने कार्रवाई करते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए थे जो फिलहाल जारी है। वह वर्तमान में झांसी के डीआईजी हैं।

सैकड़ों की संख्या में बुधवार को कानपुर शहर के घंटाघर चौराहे पर लोगों ने प्रेम प्रकाश के खिलाफ नारे लगाकर उनका पुतला फूंका और उन्हें पदक दिए जाने पर नाराजगी प्रकट की।

प्रदर्शनकारी नीरज पांडे ने कहा कि जो पुलिस अधिकारी अभी जांच के घेरे में है, उसका सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक देने के लिए चयन कैसे किया जा सकता है। यह सही नहीं है।

मालूम हो कि पिछले वर्ष 27 सितम्बर को कानपुर के कल्याणपुर स्थित भारतीय ज्ञानस्थली स्कूल की 12 वर्षीय छात्रा दिव्या का स्कूल परिसर में बलात्कार हुआ था, जिसके बाद उसकी मौत हो गई थी।

कानपुर पुलिस ने पहले इस मामले में एक निर्दोष युवक मुन्ना को गिरफ्तार किया था। पीड़ित परिवार की मांग पर मामले की जांच करने वाली सीबी-सीआईडी ने स्कूल मैनेजर के बेटे पीयूष को आरोपी पाते हुए मुन्ना को बेकसूर बताया था।

बाद में मायावती सरकार ने शुरुआत से सवालों के घेरे में रहे तत्कालीन डीआईजी प्रेम प्रकाश के खिलाफ विभागीय जांच बैठा दी थी जबकि तीन अन्य पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया था।

पुलिस महानिदेशक कार्यालय की तरफ से मंगलवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी गई थी कि गणतंत्र दिवस पर दीर्घ एंव सराहनीय सेवाओं के लिए प्रेम प्रकाश सहित 34 अधिकारियों को पुलिस पदक के लिए चयनित किया गया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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