बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में कटौती

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में भारी कटौती की जाएगी
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के मुताबिक इसकी सभी सेवाओं में से 650 नौकरियों में कटौती की जाएगी.
ये फ़ैसला विदेश कार्यालय से मिलने वाले कुल अनुदान में 16 फ़ीसदी की कमी आने के बाद लिया गया है.
इस फ़ैसले के तहत बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की पांच भाषाओं में सेवा बंद कर दी गई है जिसमें बीबीसी हिंदी का शार्टवेव प्रसारण भी शामिल है.
वर्ल्ड सर्विस की 32 भाषाओं में से पांच भाषाओं की सेवाएं बंद करने का ऐलान किया गया है.
इनमें रूसी, मंदारिन, चीनी, तुर्की और यूक्रेनी भाषा की सेवाएं शामिल हैं.
इसके साथ ही छह अन्य भाषाओं में शार्ट वेव प्रसारण भी बंद करने की घोषणा की गई है जिनमें हिंदी, इंडोनेशियाई और स्वाहिली भाषाएं शामिल हैं.
अंग्रेजी भाषा के कुछ कार्यक्रम भी बंद किए जा रहे हैं.
इन सभी सेवाओं का रेडियो प्रसारण मार्च के अंत तक बंद हो जाएगा.
हालांकि रूसी भाषा के तीन सबसे मशहूर कार्यक्रम इंटरनेट पर जारी रहेंगे.लेकिन रूसी सेवा में काम करने वाले कुल कर्मचारियों में से आधे कर्मचारियों की नौकरी समाप्त हो जाएगी.
कटौती की घोषणा करते हुए बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के प्रमुख पीटर हॉरॉक्स ने बताया कि किन कारणों से ऐसा क़दम उठाया जा रहा है.
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के प्रमुख पीटर हॉरॉक्स का कहना है, ''सरकारी फंडिंग में अहम कटौती की वजह से ये परिवर्तन किए जा रहे हैं.हालांकि वर्ल्ड सर्विस की सेवाएँ बरकरार रहेंगी. विश्व भर में फैले अपने स्रोताओं से मिले फीडबैक से हमें मालूम है कि वर्ल्ड सर्विस को दुनिया भर में बेहद सम्मान दिया जाता है इसलिए ये बदलाव लाते हुए हमें दुख हो रहा है.लेकिन फंडिंग की मजबूरियों की वजह से ये परिवर्तन अनिवार्य हो गए थे.''
भारी कटौती
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के इस फ़ैसले के तहत आनेवाले तीन वर्षों में 650 नौकरियां खत्म हो जाएंगी.
ये संख्या वर्ल्ड सर्विस के कुल मौजूदा कर्मचारियों की संख्या की एक चौथाई है.
नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट ने इन कटौतियों का विरोध किया है
बीबीसी के मुताबिक इस फ़ैसले से वर्ल्ड सर्विस सुननेवाले स्रोताओं की कुल संख्या एक हफ्ते में 18 करोड़ से घटकर 15 करोड़ रह जाएगी यानि स्रोताओं की संख्या में तीन करोड़ की कमी आएगी.
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के पूर्व प्रमुख सर जॉन तूसा के मुताबिक मौजूदा फैसले स्रोताओं, ब्रिटेन की विदेश नीति और खुद वर्ल्ड सर्विस के लिए के लिए बेहद दुखद हैं.
ब्रिटेन की नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट ने इन घोषणा पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.
यूनियन के नेता जर्मी डीयर ने कहा है कि ऐसी प्रसारण सेवा जिस पर ब्रिटेन को गर्व है, उसको नष्ट करने से पत्रकारों और बीबीसी के कर्मचारियों का नाराज़ होना जायज़ है.
लेकिन ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग इन कटौतियों को उचित ठहराया है.
ब्रितानी संसद में उन्होंने कहा कि वर्ल्ड सर्विस जितना संभव हो उतनी कार्यकुशलता से चलनी चाहिए और उसकी प्राथमिकताएँ नए बाज़ार, ऑनलाइन और मोबाइल बाज़ार हैं.


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