गणतंत्र दिवस : सांस्कृति विरासत व समृद्ध परम्परा के साथ सैन्य क्षमता का प्रदर्शन (राउंडअप)

नई दिल्ली, 26 जनवरी (आईएएनएस)। देशभर में बुधवार को 62वां गणतंत्र दिवस उत्साह से मनाया गया। मुख्य समारोह दिल्ली के राजपथ पर हुआ। गणतंत्र दिवस परेड में भारत की धार्मिक विरासत के साथ सूफी परम्परा और बिदरी कला की झलक भी देखी गई। मनोहारी झांकियों में देश की समृद्ध परम्परा एवं सांस्कृतिक विविधता दिखाई दी। साथ ही सैन्य शक्ति का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सासिला बाम्बांग युधोयोनो मौजूद रहे।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्य बिहार और कर्नाटक की झांकियों में सूफी परम्परा और बिदरी शिल्प की झलक देखने को मिली जबकि परेड के दौरान गुजरात की झांकी में बौद्ध विरासत का नमूना नजर आया।

बौद्ध धार्मिक स्थलों के लिए चर्चित बिहार की झांकी में पटना के मनेर स्थित सूफी दरगाह को चित्रित किया गया। 17वीं शताब्दी में मख्दूम शाह दौलत द्वारा निर्मित इस दरगाह की झांकी के दौरान अमिर खुसरो के प्रसिद्ध सूफी गीत 'छाप तिलक सब छीनी रे' बज रहा था। कर्नाटक की झांकी में बिदरी शिल्प की झलक देखने को मिली। इस कला को ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के अनुयायियों ने लाया था। वहीं गुजरात का बौद्ध धर्म से बहुत अधिक जुड़ाव नहीं होने के बावदूज उसकी झांकियों में बौद्ध धर्म की झलक देखने को मिली।

परेड के दौरान कवि एवं दार्शनिक रवींद्रनाथ टैगोर पर आधारित दो झांकियों को देखकर केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और रेल मंत्री ममता मुखर्जी के चेहरे खिल उठे। टैगोर की मूर्ति देखकर और उनके प्रसिद्ध गीत 'जोबी तोर डाक सुने' को सुनकर दोनों नेताओं के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। कुछ ही मिनट बाद रेल मंत्रालय की झांकी में एक बार फिर टैगार की विशाल प्रतिमा दिखी।

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने सेना और अर्धसैनिक बलों की सलामी ली। परेड के दौरान 'सारे जहां से अच्छा', 'गंगोत्री', 'जय भारती' और 'कदम कदम बढ़ाए जा' जैसे सुमधुर गीतों से माहौल देशभक्तिमय हो गया।

इस दौरान सेना के सामरिक शक्ति का भी भरपूर प्रदर्शन हुआ। मुख्य आकर्षण का केंद्र हल्के लड़ाकू विमान तेजस, मुख्य युद्धक टैंक टी-90 और सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस रहे।

परेड में भारत की विविधता में एकता और साम्प्रदायिक सौहाद्र्र के भी नजारे प्रतिबिम्बित हुए। इसके अलावा देश के सभी भागों का अद्भुत संतुलन परेड की संपूर्णता में देखने को मिला।

समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने मेजर लायसराम ज्योतिन सिंह को देश में वीरता के सर्वोच्च पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया। ज्योतिन सिंह सेना के चिकित्सक थे। वह पिछले साल अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास पर हुए आतंकी हमले के दौरान आतंकियों से लड़ते समय शहीद हो गए थे।

उत्तराखण्ड में राजधानी देहरादून सहित अन्य स्थानों पर ध्वाजारोहरण के अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। मुख्य समारोह राजधानी देहरादून के परेड ग्राउण्ड में आयोजित किया गया। यहां राज्यपाल मारग्रेट अल्वा ने ध्वाजारोहण कर परेड की सलामी ली। इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के अलावा कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

गुजरात में राज्यपाल डा. कमला बेनीवाल ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली। समारोह में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्य सचिव ए.के. ज्योति और राज्य के पुलिस प्रमुख मौजूद थे। राज्यपाल ने राज्य पुलिस सहित सुरक्षा बलों के जवानों की सलामी ली। मोटरसाइकिल पर हैरतअंगेज कारनामे और जिमनास्टिक प्रस्तुतियां समारोह के अन्य आकर्षण रहे।

स्कूली छात्रों ने सूर्य वंदना प्रस्तुत की जबकि 23 झांकियों में विभिन्न सरकारी विभागों की उपलब्धियों को दर्शाया गया। राज्य के विभिन्न जिलों की झांकियों में समृद्धि की झलक पेश की गई। राज्य सरकार ने पिछले पखवाड़े 1,100 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की घोषणा की है।

मध्य प्रदेश में राजधानी भोपाल सहित अन्य स्थानों पर ध्वजारोहण के अवसर पर रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्वालियर के एसएएफ मैदान पर ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली। चौहान ने कहा कि यह ऐसा दिन है जब हमें गण और तंत्र के बीच की दूरी को कम करने का संकल्प लेना चाहिए।

उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने गणतंत्र दिवस पर आयोजित समारोह के दौरान नक्सलियों को पराजित करने का संकल्प जताया। नक्सलियों को प्रदेश के विकास में अवरोध बताते हुए पटनायक ने कहा कि सरकार नक्सलियों की चुनौती खत्म करेगी।

वहीं कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच फील्ड मार्शल मानेकशॉ परेड मैदान पर आयोजित समारोह में ध्वजारोहण किया। सफेद सूट और जेब में गुलाब रखकर समारोह में पहुंचे भारद्वाज ने परेड की सलामी ली। इस अवसर पर मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा, कैबिनेट मंत्री और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

महाराष्ट्र के राज्यपाल के. शंकरनारायणन ने शिवाजी पार्क में आयोजित समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। राज्यपाल ने मध्य मुम्बई के दादर में आयोजित परेड में सुरक्षा बलों की सलामी ली। परेड में 200 से ज्यादा स्कूली छात्रों ने भी हिस्सा लिया। प्रदेश के स्कूल, कॉलेजों और अन्य संस्थानों में ध्वजारोहण के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए।

नासिक जिले के मालेगांव में कड़ी सुरक्षा के बीच ध्वजारोहण किया गया। यहां मंगलवार को तेल माफियाओं ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर को जिंदा जला दिया था।

उधर, गणतंत्र दिवस के मौके पर बुधवार को नक्सलियों ने झारखण्ड के पलामू जिले के एक स्कूल की इमारत में विस्फोट किया और काला झंडा फहराया। नक्सलियों ने राजहारा खुट्टी गांव स्थित स्कूल की इमारत पर हमले के लिए डेटोनेटर का इस्तेमाल किया। इसके अलावा अन्य दो स्कूलों में भी काले झंडे गाड़े।

पूर्वोत्तर भारत में लोगों ने अलगावादियों के बहिष्कार को दरकिनार करते हुए गणतंत्र दिवस के समारोह में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। अलगाववादी विद्रोहियों ने बुधवार को हड़ताल का एलान किया था।

'युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम' (उल्फा) सहित छह प्रतिबंधित अलगावादी संगठनों ने गणतंत्र दिवस के दिन असम, मणिपुर और त्रिपुरा में 17 घंटे के बंद का आह्वान किया था। कुछ छिटपुट घटनाओं के बीच पूरे उल्लास के साथ इन राज्यों में गणतंत्र दिवस मनाया गया। राज्यपाल जे. बी. पटनायक ने गणतंत्र दिवस के अपने भाषण में कहा, "हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है। मुझे उम्मीद है कि अलगाववादी समूह मुख्यधारा में आएंगे और हत्याएं व खून-खराबा बंद करेंगे।"

त्रिपुरा और मणिपुर के मुख्यमंत्रियों ने भी अलगाववादियों से सरकार के साथ शांतिवार्ता स्थापित करने की अपील की।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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