काबुल में आतंकियों का सामना करने वाले मेजर को अशोक चक्र

राजपथ पर आयोजित समारोह में परेड शुरू होने से पहले ज्योतिन सिंह के भाई को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने अशोक चक्र पदक सौंपा।

वर्ष 1972 में जन्मे सिंह फरवरी 2003 में सेना की चिकित्सा शाखा में पदस्थ हुए थे। अप्रैल 2007 में उन्हें स्थाई नियुक्ति मिली थी और पिछले साल फरवरी में उन्हें काबुल में भारतीय दूतावास में नियुक्त किया गया था।

उनकी नियुक्ति के 13 दिन बाद ही दूतावास के पास एक आवासीय परिसर पर आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें सेना के छह चिकित्सा अधिकारी, चार पैरा चिकित्सक और दो सैन्य अधिकारी मौजूद थे।

आतंकियों ने तीन सुरक्षा कर्मियों को मार दिया और परिसर में मौजूद अन्य लोगों की ओर बढ़े। उन्होंने क्लाशिनिकोव से अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी और ग्रेनेड फेंके।

इस दौरान पांच निहत्थे अधिकारी एक कमरे में थे। आतंकियों ने वहां ग्रेनेड फेंका जिससे कमरे की छत में आग लग गई। यह आग उस बाथरूम तक फैल गई जिसमें अन्य पांच निहत्थे अधिकारियों ने आश्रय लिया था।

तभी सिंह ने कमरे के मलबे से निकलकर निहत्थे ही आतंकी पर हमला कर दिया और उसे जमीन पर गिरा दिया। उन्होंने आतंकी को तब तक नहीं छोड़ा जब तक उसकी जैकेट में बंधा विस्फोटक फट नहीं गया। इस विस्फोट में सिंह शहीद हो गए।

सिंह ने अपनी जान देकर अपने पांच साथियों की जान बचा ली। इनमें से एक ने जख्मों के चलते पांच दिन बाद दम तोड़ दिया और एक अन्य अभी भी अस्पताल में है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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