सामाजिक परिवेश पर ध्यान देने की जरूरत : राष्ट्रपति

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर अपने संबोधन में पाटील ने कहा कि यह अत्यंत ही क्षोभ तथा चिंता का विषय है कि मात्रा कुछ पैसों के लिए किसी व्यक्ति की हत्या हो जाए; अथवा कोई महिला इसलिए बलात्कार का शिकार हो क्योंकि उसने छेड़छाड़ का विरोध किया था अथवा संयम की कमी के कारण किसी छोटी-सी बात पर एकदम से बहुत बड़ा झगड़ा खड़ा हो जाए। इसी तरह, शिक्षण संस्थाओं में रैगिंग के मामले भी चिंताजनक हैं।

उन्होंने कहा कि रैगिंग हिंसा है। यह ऐसा जघन्य कृत्य है, जिसे सहन नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इसके कारण माता-पिता और देश को बेहद क्षति पहुंचती है। ऐसी घटनाओं से हमारे सामाजिक ताने-बाने को बहुत नुकसान पहुंचता है। इसलिए यह जरूरी है कि सामाजिक सौहार्द तथा समरसता के हित में, इस तरह की प्रवृत्तियों पर नियंत्राण रखा जाए।

उन्होंने कहा कि मैं अपने देशवासियों से आग्रह करती हूं कि वे कभी भी हिंसा का सहारा न लें। हमारे देश ने, अहिंसा तथा सत्य के उत्तम मार्ग का अनुसरण करते हुए आजादी प्राप्त की। एक स्वतंत्रा राष्ट्र के रूप में, अपनी यात्रा में भी हमें इसका पालन करते हुए, नैतिक शक्ति का प्रदर्शन करना होगा। समाजों की तरक्की तब सही दिशा में होती है, जब उनके सदस्य, सकारात्मक परिवर्तन लाने तथा सामाजिक बुराइयों को खत्म करने की दिशा में प्रयास करते हैं।

पाटील ने कहा कि मैंने वर्ष 2008 में, गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर अपने प्रथम संबोधन में, सामाजिक, आर्थिक, प्रशासनिक और राजनीतिक कार्यो को नैतिक मूल्यों तथा सामाजिक न्याय का ध्यान रखते हुए किए जाने की जरूरत के बारे में बात की थी। मैं, फिर से निष्ठा, ईमानदारी, सद्-आचरण तथा उच्च मूल्यों के महव पर जोर देना चाहूंगी, जो कि हमारी संस्कृति द्वारा प्रदान किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे देश के युवाओं को इस विरासत को आगे लेकर जाना होगा। देश के भविष्य के निर्माताओं के रूप में, उन्हें मूल्य-आधारित शिक्षा प्रदान करते हुए शिक्षित करना, उनके चारित्रिाक विकास के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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