संसद का सफलतापूर्वक संचालन सरकार और विपक्ष जिम्मेदारी : पाटील
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर अपने संबोधन में पाटील ने कहा कि इसकी निरंतरता, भारत की पहचान के लिए जरूरी है, जो कि विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और बहुत सी विषमताओं के बावजूद सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो रहा है। हमें न केवल लोकतांत्रिाक संस्थाओं और इसकी प्रक्रियाओं को मजबूती देनी होगी वरन् जाने-अनजाने में किए गए ऐसे किसी भी कार्य से बचना होगा, जिससे लोकतंत्रा कमजोर पड़ता हो अथवा जो लोकतंत्रा के लिए हानिकारक हो।
उन्होंने कहा कि हमारे देश की संसद जनता की संप्रभु इच्छाशक्ति का प्रतीक है तथा इसका सफलतापूर्वक संचालन सरकार और विपक्ष दोनों ही पक्षों की संयुक्त जिम्मेदारी है।
पाटील ने कहा कि यह बहुत ही जरूरी है कि, सभा की मर्यादा तथा गरिमा हर समय बनाए रखी जाए। जनता के बीच संसद की छवि, एक ऐसी संस्था की होनी चाहिए, जहां रचनात्मक सहयोग की भावना के साथ मुद्दों का समाधान खोजने के लिए कार्यवाहियां, चर्चा तथा विचार विमर्श होते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता तो, लोकतांत्रिाक संस्थाओं पर जनता के भरोसे पर असर पड़ सकता है और हताशा की भावना पैदा होती है, जिसे किसी भी स्वस्थ लोकतंत्रा में स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे लोकतांत्रिाक संस्थाएं असफल होती हैं। इसलिए लोकतांत्रिक संस्थाओं में भागीदारों के बीच विचार-विमर्श, लोकतांत्रिाक प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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