विकास दर 9 प्रतिशत से अधिक रहेगी : राष्ट्रपति (लीड-1)
पाटील ने कहा कि हमारे विकास की इस रफ्तार में, अर्थव्यवस्था के सभी सेक्टरों का योगदान रहेगा। परंतु बढ़ती महंगाई, विशेषकर खाद्य पदार्थो की कीमतें, गंभीर चिंता का विषय हैं और इसने हमारा ध्यान उचित कार्रवाई करने और खाद्य सुरक्षा, कृषि उत्पादन और ग्रामीण विकास के लिए नव-अन्वेषी तरीकों की खोज की जरूरत की ओर खींचा है।
उन्होंने कहा कि खाद्यान्न में राष्ट्र को आत्मनिर्भर बनाने वाली हरित क्रांति का दौर पूरा हो चुका है। हमें दूसरी हरित क्रांति की जरूरत है जिसमें अधिक से अधिक पैदावार ली जा सके और जिसमें साथ ही ग्रामीण आबादी के लिए आय और रोजगार के अवसर भी पैदा हों। पहली हरित क्रांति ज्यादातर सिंचित इलाकों तक सीमित थी और अब हमें वर्षा-सिंचित इलाकों पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा, जो कि दूसरी हरित क्रांति का पालना बन सकता है।
पाटील ने कहा कि हमें ध्यान रखना होगा कि हमारी खेती टुकड़ों में और छोटी-छोटी है तथा आगे चलकर इनका आकार और भी छोटा होने की संभावना है, जिससे खेती की आर्थिक व्यवहार्यता एक बड़ी समस्या बन सकती है। कहा जा रहा है कि छोटे किसान अब खेती छोड़ रहे हैं क्योंकि इसमें अब कम आय है तथा खेतीहर मजदूर भी नहीं मिल पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में, आधुनिकीकरण तथा यांत्रिक खेती पर ध्यान देना फायदेमंद होगा तथा कृषि तथा ग्रामीण विकास में किसानों, निजी क्षेत्रा तथा सरकार के बीच साझीदारी का मॉडल विकसित करने पर भी विचार करना चाहिए। हर व्यवस्था में, यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि किसान, खेती से जुड़े प्रत्येक कार्य में भागीदार होता है, चाहे वह जुताई संबंधी कार्यकलाप हो, भंडारण हो, प्रसंस्करण हो, विपणन हो या फिर अनुसंधान अथवा विकास हो। इसलिए, किसानों को इन सभी गतिविधियों में, ऐसी संवेदनशीलता के साथ शामिल किया जाना चाहिए, जिससे उनके अधिकार, जमीन और उसके उत्पादन पर सुरक्षित रह सकें।
पाटील ने कहा कि कारपोरेट जगत को, खासकर वर्षा सिंचित क्षेत्रा में, कृषि उपज को लाभकारी बनाने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, क्योंकि खाद्य सुरक्षा देश के लिए अत्यंत महवपूर्ण है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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