काले धन पर प्रणब का बयान टाल मटोल वाला : भाजपा (लीड-1)
भाजपा के प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने संवाददाताओं से कहा कि मुखर्जी के बयान में काले धन को देश में वापस लाने और नामों को सार्वजनिक करने की कोई प्रतिबद्धता नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब भाजपा ने 2009 में चुनाव के दौरान इस मुद्दे को उठाया था, तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसे चुनावी स्टंट बताया था।
बाद में इस मुद्दे को मिल रहे जनसमर्थन को देखते हुए कांग्रेस ने चुनावी घोषणा पत्र सत्ता में आने के 100 दिनों के भीतर इस बारे में सार्थक कदम उठाने का वादा किया था। इसके बाद दो साल का समय बीत चुका है और सरकार काले धन को विदेश में जमा करने वालों को आम माफी देने और पांच सूत्री कदम उठाने पर विचार कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार नाम को सार्वजनिक करने के लिए ठोस पहल नहीं करना चाहती है, क्योंकि यदि नाम को सार्वजनिक किया गया, तो इससे कांग्रेस के सामने मुश्किल खड़ा हो सकती है।
प्रसाद ने इस मामले में सरकार को अमेरिका द्वारा उठाए गए कदमों से सीख लेने की सलाह दी।
उन्होंेने पुणे के हसन अली का जिक्र करते हुए कहा कि उन पर हजारों करोड़ रुपये का कर बकाया है, लेकिन उसके सम्पर्क की वजह से उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सख्त टिप्पणी की जाने के बावजूद सरकार में इच्छा शक्ति की कमी है। भाजपा इस मुद्दे को संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह उठाएगी।
मुखर्जी ने मंगलवार को कहा था कि विदेशों में भारतीयों द्वारा 1,400 अरब डॉलर काले धन के जमा रखने का अनुमान है। इसे वापस लाने के लिए सभी कदम उठाए गए हैं, लेकिन विदेश में काला धन जमा रखने वालों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जा सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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