काबुल हमले में शहीद सैन्य चिकित्सक को अशोक चक्र
उनके परिवार के एक सदस्य राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील से मेडल ग्रहण कर सकते हैं, हालांकि रक्षा मंत्रालय को अब तक यह सूचना नहीं मिली है कि मेडल ग्रहण करने के लिए परेड समारोह में परिवार से कौन उपस्थित रहेंगे।
मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि परिवार से किसी सदस्य के मौजूद नहीं होने की स्थिति में सेना ने सिंह की टुकड़ी के एक जवान द्वारा पदक ग्रहण किए जाने की वैकल्पिक व्यवस्था कर रखी है।
सिंह का जन्म 1972 में हुआ था। वे फरवरी 2003 में सेना की चिकित्सा सेवा से जुड़े। पिछले साल 13 फरवरी को उनकी काबुल में भारतीय दूतावास में तैनाती की गई थी।
उनकी तैनाती के 13 दिनों बाद ही दूतावास पर आतंकवादियों का आत्मघाती हमला हुआ। आतंकवादियों ने मुख्य दरवाजे पर तैनात सुरक्षा जवानों की हत्या कर परिसर में प्रवेश किया और मौजूद लोगों पर गोलियों और हथगोलों की बारिश शुरू कर दी।
भगदड़ और गोलाबारी के बीच सिंह ने एक आतंकवादी को पकड़ लिया। आतंकवादी ने घबराकर अपने सीने पर लगा आत्मघाती बम विस्फोट कर दिया, जिससे तत्काल सिंह की मौत हो गई।
उनके मेडल प्रशस्ति पत्र में लिखा गया है कि अपने पांच सहकर्मियों को बचाने के लिए मेजर लैशराम ज्योतिन सिंह ने अपनी जान की कुर्बानी दे दी।
सिंह को पिछले साल स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर मरणोपरांत अशोक चक्र के लिए नामित किया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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