उद्योग जगत को दरों में और वृद्धि की चिंता
आरबीआई द्वारा कर्ज दर को बढ़ाकर 6.5 फीसदी उधार दर को बढ़ाकर 5.5 फीसदी करने से व्यावसायिक, आवासीय और वाहन ऋण महंगा हो सकता है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के महासचिव और अर्थशास्त्री अमित मित्रा ने कहा कि वे दरों में आगे और वृद्धि की सम्भावना से चिंतित हैं। इससे भारतीय उद्योगों के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
बाजार में तरलता की पहले से कमी के बाद ब्याज दरों में वृद्धि से बैंकों की तरलता पर दबाव पड़ेगा और बैंक भी कर्ज की दरों में वृद्धि करने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने पिछले साल जनवरी से अब तक सातवीं बार दरों में वृद्धि करने के बाद कहा कि दरों में इस वृद्धि का देश की अर्थव्यवस्था के कुल विकास पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
आरबीआई ने कारोबारी साल के अंत तक महंगाई के अनुमान को भी बढ़ाते हुए इसे 5.5 फीसीद की जगह सात फीसदी कर दिया। आरबीआई ने विकास दर के अनुमान को 8.5 फीसदी पर बरकरार रखा।
भारतीय उद्योग परिसंघ के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि आरबीआई द्वारा दरों में लगातार की जा रही वृद्धि से निवेश की गति में शिथिलता आ सकती है।
बनर्जी ने भी बैंकों की तरलता पर दबाव को देखते हुए बैंकों की कर्ज दरों में वृद्धि की सम्भावना जताई।
प्रमुख बैंकों ने पहले ही दरों में वृद्धि की सम्भावना के आलोक में कर्ज दर में वृद्धि की सम्भावना की घोषणा कर दी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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