सुब्रत राय, सहारा अधिकारियों के खिलाफ वारंट जारी (लीड-1)
अदालत को दी गई शिकायत में कहा गया सहारा समूह ने मकान का वादा कर निवेशकों के 25,000 करोड़ रुपये ले लिए और अब उन्हें वेबकूफ बनाया जा रहा है।
सहारा इंडिया समूह की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उन पर बेतुके आरोप लगाए जा रहे हैं।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विनोद यादव ने दिल्ली पुलिस को वारंट पर नौ फरवरी तक अमल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने इस मामले में जांच पर गौर करने और शिकायतकर्ता नीरज पांडे और उनकी पत्नी बीना के बयान दर्ज करने के बाद आदेश जारी किया। शिकायतकर्ता ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 2003 में सहारा की प्रस्तावित 'सहारा स्वर्ण योजना' में एक लाख रुपये का निवेश किया उसके बाद भी उसे फ्लैट का आवंटन नहीं किया गया।
पांडे ने छह अधिकारियों के खिलाफ आवेदन किया था, जिसमें रॉय, उप प्रबंध निदेशक ओम प्रकाश श्रीवास्तव, जॉय ब्रोटो रॉय और स्वप्ना रॉय और दिल्ली परियोजना अधिकारी एच. एस. रावत शामिल हैं।
पांडे के वकील आशुतोष भारद्वाज ने कहा कि कम्पनी ने 25,000 निवेशकों को फ्लैट आवंटित करने का वादा कर हर एक से एक लाख रुपये ले लिए, जबकि कभी फ्लैट बना ही नहीं।
शिकायतकर्ता ने 12 अप्रैल, 2009 को दर्ज अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि 2003 में फ्लैट देने का वादा करने के बाद इस पर कोई काम आगे नहीं बढ़ाया गया। छह साल बाद कम्पनी ने 1.58 लाख रुपये वापस करने का प्रस्ताव रखा।
पांडे ने पुलिस से कम्पनी के खिलाफ धोखा, छल और धमकाने की शिकायत की। पुलिस द्वारा कम्पनी और उसके अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर पांडे ने अदालत में शिकायत की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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