मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दर बढ़ने की सम्भावना
आरबीआई ने मौजूदा कारोबारी साल में बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए अब तक छह बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। इस दौरान आरबीआई ने कर्ज (रेपो) और उधार (रिवर्स रेपा) दरों में क्रमश: 150 और 200 आधार अंकों में बढ़ोतरी कर दी है।
कारोबारी जगत को हालांकि दरों में सम्भावित वृद्धि से चिंता सता रही है, क्योंकि इससे बैंकों में भी कर्ज की दरों में इजाफा हो जाएगा और इसका सीधा असर कारोबारी कम्पनियों के मुनाफे पर पड़ेगा।
उद्योग जगत की प्रतिनिधि संस्था फिक्की के महासचिव और अर्थशास्त्री अमित मित्रा ने कहा कि आने वाले महीनों में निर्माण क्षेत्र पर इसका नकारात्मक असर दिखाई पड़ सकता है।
आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि से वाहन और आवासीय ऋण की दरों में भी वृद्धि की सम्भावना है, क्योंकि बैंक अपने ऊपर ऊपर पड़ने वाला दबाव ग्राहकों के सिर पर डालना चाहेंगे।
अर्थशास्त्रियों का हालांकि मानना है कि ब्याज दरों में वृद्धि से महंगाई को नियंत्रित करने में कोई फायदा नहीं होगा, क्योंकि महंगाई आपूर्ति श्रंखला की खामियों की वजह से है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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