येदियुरप्पा के खिलाफ 3 नए मामले, भाजपा पहुंची राष्ट्रपति दरबार (राउंडअप)
भूमि आवंटन से सम्बंधित भ्रष्टाचार के एक मामले में कर्नाटक के मुख्यमंत्री के खिलाफ राज्यपाल द्वारा अभियोग चलाने की अनुमति देने के खिलाफ भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में पार्टी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर उन्हें 15 पृष्ठों का एक ज्ञापन भी सौंपा।
सोमवार को दाखिल दोनों मामलों को मिलाकर मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा दायर कराने वाले वकीलों सिराजिन बाशा और के.एन. बलराज द्वारा अब तक कुल पांच मामले दाखिल कराए गए हैं।
वकीलों ने ये शिकायतें भ्रष्टाचार निरोधक कानून और अपराध प्रक्रिया संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत दाखिल कराई हैं। इनमें अवैध तरीके से भूमि हस्तांतरण, पद का दुरुपयोग, राजनीतिक षडयंत्र, धोखाधड़ी जैसे मामले हैं।
ज्ञात हो कि गत 28 दिसम्बर को इन वकीलों ने राज्यपाल को पत्र लिखकर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे येदियुरप्पा के खिलाफ आपराधिक अभियोग चलाने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।
येदियुरप्पा और उनके दो पुत्रों बी.वाई. राघवेंद्र और बी.वाई. विजयेंद्र के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। बी.वाई. राघवेंद्र भाजपा के लोकसभा सदस्य हैं।
बहरहाल, येदियुरप्पा ने कहा है कि इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि राज्य सरकार के खिलाफ टिप्पणी करने के लिए वह राज्यपाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराएंगे।
येदियुरप्पा ने दावा किया, "सरकार के खिलाफ राज्यपाल को जितनी भी याचिकाएं दायर की गई हैं उनका प्रारूप राजभवन में तैयार किया गया।" उन्होंने हालांकि इसका विस्तृत ब्योरा देने से इंकार कर दिया।
उधर, नई दिल्ली में राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राष्ट्रपति भवन के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में आडवाणी ने कहा, "हम यहां राष्ट्रपति का दरवाजा खटखटाने आए हैं क्योंकि भारद्वाज जिस तरीके से काम कर रहे हैं वह संविधान के खिलाफ है।"
उन्होंने कहा, "राज्यपाल ने संविधान का अपमान किया है। वह पहले दिन से ही पक्षपाती हैं और उन्होंने पद की गरिमा को धूमिल किया है।" आडवाणी ने आरोप लगाया कि राज्यपाल अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करना चाहते हैं।
आडवाणी ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति से कहा कि जब किसी व्यक्ति को राज्यपाल बनाया जाता है तो उससे अपेक्षा की जाती है कि वह संविधान के तहत और अपने पद की गरिमा को ध्यान में रखते हुए काम करे लेकिन कर्नाटक में ऐसा नहीं हुआ।
उन्होंने कहा, "हमने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वह राज्यपाल को तुरंत वापस बुलाएं। उन्हें वापस बुलाए जाने से कर्नाटक की जनता, देश के संविधान और राज्यपाल पद की गरिमा की रक्षा होगी।"
आडवाणी ने कहा कि कुछ महीने पहले ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर हमने कर्नाटक के राज्यपाल के आचरण की ओर उनका ध्यान आकृष्ट कराया था।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में आडवाणी के अलावा लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली, वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू और कर्नाटक से भाजपा के सांसद शामिल थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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