बांदा मामले में बाल आयोग की चुप्पी पर उठा सवाल
ईरानी की ओर से वकील मीनाक्षी लेखी ने सोमवार को आयोग को एक नोटिस भेजा है, जिसमें पूछा गया कि आयोग एक संवैधानिक इकाई है और इसका गठन बच्चों के शोषण के मामलों का पता लगाना और ऐसे मामलों पर कार्रवाई का सुझाव देने के लिए किया गया है, इसके बावजूद आयोग ने बांदा बलात्कार मामले में किसी तरह की कार्रवाई क्यों नहीं की।
बांदा में कथित तौर पर सत्ताधारी पार्टी के विधायक द्वारा बलात्कार की शिकार नाबालिग लड़की को आवाज उठाने से रोकने के लिए जिला कारावास में 30 दिनों तक बंद रखा गया। नोटिस में कहा गया कि पीड़िता को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद मुक्त किया गया, लेकिन आयोग ने इस मामले में कोई पहल नहीं की।
आयोग से पूछा गया है कि वह बताए कि उसने इस मामले में कौन-कौन से कदम उठाए हैं और यह कि वह किस आधार पर कार्रवाई के लिए मामलों का चयन करती है।
आयोग की चुप्पी पर ऐतराज करते हुए इसमें संदेह जताया गया है कि आयोग ने एक संवैधानिक संस्था होने के बाद संवैधानिक दायित्वों को निभाने में शिथिलता बरती।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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