निर्मल अंतर्रात्मा के हैं मेरे पिता : प्रधानमंत्री की बेटी
जयपुर, 24 जनवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बेटी और उपन्यासकार दमन सिंह ने कहा है कि उनके पिता की साफ अंतर्रात्मा, ईमानदारी और सादगी उन्हें दूसरों से अलग बनाती है। अपने माता-पिता की जीवनी लिख रहीं दमन का कहना है कि वह अपने पिता के पेशेवर जीवन में दिलचस्पी नहीं रखती हैं। इस जीवनी में वह उन्हें सिर्फ एक 'मनुष्य' के रूप में देखना चाहती हैं।
डीएससी जयपुर साहित्य महोत्सव में हिस्सा लेने आईं दमन ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "मेरे पिता मजबूत और निर्मल अंतर्रात्मा के व्यक्ति हैं। उनका मुख्य उद्देश्य दूसरों को खुश करने की बजाय अपनी अंतर्रात्मा के बल पर सेवा करना हैं। उन्हें अपनी अंतर्रात्मा की आवश्यकताओं को संतुष्ट करना पड़ता है, ताकि चीजें स्पष्ट रहें। उनके भीतर निहित सादगी और ईमानदारी उनकी सबसे बड़ी विशेषता है।"
उन्होंने कहा, "तपस्या उनके जीवन का व्यक्तिगत सिद्धांत है, जिसे उन्होंने अपने युवा काल में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू जैसे महापुरुषों और स्वाधीनता संग्राम की पूरी पीढ़ी से सीखा है। उन्होंने ही इस पथ पर चलने को उन्हें प्रेरित किया।"
दमन दो उपन्यास 'नाइन बाई नाइन' और 'द सेक्रेड ग्रोव ' लिख चुकी हैं। इसे प्रकाशन कम्पनी हार्पर कोलिन्स-इंडिया ने प्रकाशित किया है। सिंह पहली बार उपन्यास से हटकर अपने माता-पिता मनमोहन सिंह और गुरुचरण कौर की 'जीवनी' लिख रही हैं। यह उनकी तीसरी कृति होगी।
उन्होंने कहा, "मेरी मां मैत्रीपूर्ण और मिलनसार व्यक्तियों में से एक हैं। मैं जब भी उनसे मिलती हूं तो उन्हें लोगों की मदद करते हुए पाती हूं। इसके साथ ही वह हंसमुख और विनोदी व्यक्तित्व की भी धनी हैं।"
दमन ने किताब लिखने के लिए शोधकार्य शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा, "इसमें वक्त लगता है" हालांकि उन्होंने उसी समय साफ कर दिया कि वह अपने माता-पिता को मानवीय तरीके से देखना चाहती हैं।
उन्होंने कहा, "मुझे पिता जी के पेशेवर जीवन में कोई दिलचस्पी नहीं है। मैं उनके सार्वजनिक जीवन से बिल्कुल प्रभावित नहीं हूं।"
दमन ने कहा, "मैं अभी भी अपने माता-पिता, पारिवारिक मित्रों और रिश्तेदारों से उनके बचपन के बारे में बातचीत करती हूं। मैं घटनाओं को वास्तव में देशकाल परिस्थिति के अनुसार जानना चाहती हूं। वे बच्चों की तरह ही विभाजन से परोक्ष रूप से प्रभावित हुए थे और उन हालात को समझने के लिए मैंने दर्जनों किताबें पढ़ी हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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