भाजपा नेताओं को जम्मू हवाई अड्डे पर रोका गया, विरोध शुरू (लीड-1)
जम्मू/नई दिल्ली, 24 जनवरी (आईएएनएस)। श्रीनगर के लाल चौक पर गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगा फहराने के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए जम्मू पहुंचें भाजपा के आला नेताओं सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और अनंत कुमार को जम्मू हवाई अड्डे पर ही सोमवार को रोक दिया गया।
तीनों नेताओं को हवाई अड्डे से बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है और उन्हें वापस दिल्ली लौटने को कहा गया है। इसके विरोध में तीनों भाजपा नेता वहां धरने पर बैठ गए हैं।
ज्ञात हो कि सुषमा लोकसभा में विपक्ष की नेता है तो जेटली राज्यसभा में विपक्ष के नेता। अनंत कुमार पार्टी के केंद्रीय महासचिव हैं।
भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की राष्ट्रीय एकता यात्रा में हिस्सा लेने के लिए तीनों नेता सोमवार अपराह्न् जम्मू पहुंचें। यहां से उनका श्रीनगर जाने का कार्यक्रम था लेकिन पुलिस ने उन्हें जम्मू हवाई अड्डे से बाहर जाने और शहर में प्रवेश करने से रोक दिया।
पुलिस अधिकारियों ने सुषमा, जेटली और अनंत से कहा है कि शहर में उनके प्रवेश से समस्या पैदा हो सकती है।
इस बीच, सुषमा ने ट्विटर पर लिखा है, "जैसे ही हम जम्मू पहुंचे, हमने पाया कि टर्मिनल दरवाजों को बंद कर दिया गया है। हमें बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने (पुलिस) हमें धारा 144 के तहत नोटिस दिया है। वे चाहते हैं कि हम वापस लौट जाएं।"
सुषमा ने आगे लिखा है, "हमारा अपराध क्या है? हम सिर्फ अपने राष्ट्रीय झंडे को फहराना चाहते हैं।"
इधर, नई दिल्ली में भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "सुषमा, जेटली और अनंत को रोकने का निर्णय सिर्फ मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का नहीं है। यह भारत सरकार के निर्देश पर हुआ है।"
उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह देश में तनाव चाहती है और भ्रष्टाचार के आरोपों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा, "सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद हम उद्वेलित नहीं होंगे।"
प्रसाद ने कहा, "न तो कांग्रेस, न पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और न जम्मू एवं कश्मीर के अवाम से हमारा टकराव है। हमारा टकराव उन अलगाववादियों से है, जो तिरंगा फहराने का विरोध कर रहे हैं। लेकिन यह आश्चर्य की बात है को इस टकराव को कांग्रेस बनाम भाजपा का रूप दिया जा रहा है।"
उन्होंने कहा, "सरकार के इस रवैये से आपातकाल के दिनों की याद ताजा हो गई है। इससे कांग्रेस की साख गिरी है और देश में यही संदेश जा रहा है कि सरकार को तिरंगा फहराए जाने पर आपत्ति है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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