'नक्सलवाद के खात्मे के लिए करें जनजातियों के हितों की रक्षा'
कोलकाता, 23 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के एक जाने-माने सदस्य ने कहा है कि शासन को यह अधिकार नहीं है कि वह अपनी पुलिस या अर्धसैनिक बल को नक्सलियों को खत्म करने का आदेश दे। उन्होंने अधिकारियों का आह्वान किया कि वे देश की जनजतियों की जरूरतों को समझें।
यहां के नेताजी अनुसंधान ब्यूरो में शनिवार को 'नए भारत में मानवाधिकार : एक खाली कप' विषय पर शिशिर कुमार बोस स्मृति व्याख्यान देते हुए एनएचआरसी के सदस्य सत्यव्रत पाल ने कहा कि वर्षो की उपेक्षा और शोषण ने कुछ ग्रामीणों और जनजातियों को नक्सली बना दिया है या नक्सलवाद के दर्शन के प्रति उनका रुझान बढ़ा दिया है।
उन्होंने कहा, "एक क्रूरतापूर्ण चक्र घूम रहा है। आर्थिक और सामाजिक अधिकारों के हनन ने नक्सलवाद को पैदा किया है। शासन अब भूल सुधारना चाहता है, लेकिन यह संभव नहीं है, क्योंकि नक्सलियों को उस पर भरोसा नहीं है।"
पाल ने कहा कि यह जानने के लिए कि क्या लोगों के राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक अधिकारों की रक्षा हो रही है, एनएचआरसी ने अल्प विकसित, सुविधाविहीन तथा सर्वाधिक उपेक्षित जिलों की एक महत्वपूर्ण सूची तैयार की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications