'एक साल उम्र से पहले हो जाती है 17 लाख बच्चों की मौत'
एनएचआरसी सदस्य सत्यब्रत पाल ने शनिवार को कहा कि जन्म लेने वाले 25 प्रतिशत बच्चों का वजन सामान्य से कम होता है और 17.2 लाख बच्चों की मौत एक वर्ष उम्र से पहले हो जाती है।
पाल ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) को भय है कि लड़कों को प्राथमिकता दिए जाने से रोजाना 2000 लड़कियों को मार दिया जाता है और प्रत्येक वर्ष सात हजार लड़कियों की जन्म से पहले उनकी हत्या अभिभावकों द्वारा की जाती है।"
इन आंकड़ों को शिशिर कुमार बोस मेमोरियल लेक्चर 'ऐन एम्पटी कप : ह्यूमन राइट्स इन इंडिया' में शामिल किया गया है। इस मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए पाल ने कहा, "एक राष्ट्र के रूप में हम इन हत्याओं को रोकने में नाकाम हुए हैं।"
उन्होंने कहा, "विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यूएचओ) के आकलन में भारत के शिशु मृत्यु दर में कमी बताई गई है। वर्ष 1970 में यह दर 1000 में 202 थी जबकि 2002 में यह दर घटकर 1000 में 90 शिशुओं पर आ गई। शिशु मृत्यु दर में यह कमी वर्ष 1990 में अर्थव्यवस्था में तेजी आने पर आई।"
पाल ने कहा, "हमारी लिंग के प्रति झुकाव के चलते लड़कियों की मृत्यु दर लड़कों से अधिक है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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