बालाकृष्णन मुद्दे पर प्रधानमंत्री की चुप्पी आश्चर्यजनक : अय्यर
कोच्चि, 23 जनवरी (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश वी.आर. कृष्णा अय्यर ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश के.जी. बालाकृष्णन पर लगे आरोपों पर चुप्पी को लेकर अब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधा है।
रविवार को अपने आवास पर संवादादाताओं से बातचीत में अय्यर ने कहा कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की उदासीनता भरी चुप्पी से वह आश्चर्यचकित हैं।
अय्यर ने कहा, "आप जानते हैं कि न्यायाधीश वी. गिरि जिन्होंने पिछले वर्ष केरल उच्च न्यायालय से इस्तीफा दिया था, मुझसे इस अपील के साथ मिलने आए कि मुझे प्रधानमंत्री को बालाकृष्णन मुद्दे के बारे में नहीं लिखना चाहिए।"
अय्यर ने कहा, "मैंने उनसे कहा कि मीडिया में इस मुद्दे के बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है। मेरे पत्र की अब जरूरत नहीं है इसलिए मैं प्रधानमंत्री को दोबारा पत्र नहीं लिखूंगा।"
दिसम्बर, 2010 में अय्यर ने बालाकृष्णन के खिलाफ हमले तेज किए थे। बालाकृष्णन अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष हैं। उन पर आरोप है कि उनके रिश्तेदारों ने आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित की है।
आरोप लगने के बाद से अय्यर ने बालाकृष्णन पर आक्षेप तेज कर दिया। यहां तक कि उनसे एनएचआरसी का पद छोड़ने और जांच का सामना करने की बात कही है।
केरल के मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन ने बाद में बालाकृष्णन के दामाद पी.वी. श्रीनिजिन के खिलाफ खुफिया जांच का आदेश दिया। युवक कांग्रेस के नेता रहे श्रीनिजिन ने आरोप लगाए जाने के बाद पार्टी का पद छोड़ दिया था।
ऐसा ही आरोप बालाकृष्णन के भाई के.जी. भास्करन पर लगने के बाद उनसे विशेष सरकारी वकील के पद से इस्तीफा देने के लिए जोर डाला गया।
वर्ष 1980 में सर्वोच्च न्यायलय से सेवानिवृत्त हुए अय्यर (95) अब भी सक्रिय हैं। वह भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का मुद्दा उठाते रहे हैं।
ज्ञात हो कि वर्ष 1957 में ई.एम.एस. नम्बूदिरीपाद के नेतृत्व में केरल में बनी विश्व की पहली निर्वाचित वामपंथी सरकार में वह कानून एवं सिंचाई मंत्री थे।
उल्लेखनीय है वर्ष 1968 में अय्यर को केरल उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। 1973 में उनकी नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय में हुई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications