तिब्बती विद्रोहियों की बंदूकों से शुरू हुआ माओवादी युद्ध
दक्षिणी नेपाल में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी(पीएलए) के जिस शिविर में शनिवार को यह हस्तांतरण हुआ वहां माओवादी नेताओं ने बताया कि वर्ष 1996 में सशस्त्र विद्रोह शुरू हुआ था। माओवादी योजनागत तरीके से भूमिगत हो जाते, हथियार जुटाते और अपने सर्मथकों को प्रशिक्षण देते थे। इस तरह का प्रशिक्षण आठ साल तक चला।
समाचार पत्र 'नया पत्रिका' के अनुसार माओवादी सांसद और पूर्व मंत्री देव गुरुं ग ने पार्टी के लिए आधुनिक हथियारों को हासिल करने की जिम्मेदारी ली।
गुरुं ग के चाचा गणेश बहादुर गुरुं ग उत्तरी नेपाल के मनांग जिले में रहते थे।
गुरुं ग अपने चाचा के जरिए वर्ष 1950 के दशक में चीनी कब्जे के खिलाफ लड़ने वाले तिब्बती लड़ाकू खम्पास से मिले थे और उनसे दो राइफलें ली थीं।
तिब्बती लड़ाकों से आधुनिक हथियार लेकर आधुनिक शस्त्रागार तैयार किया गया था और पीएलए ने वर्ष 1996 में हथियारबंद विद्रोह शुरू किया था। इसके अलावा माओवादियों के पास देसी बंदूकें और बम भी थे।
पीएलए लड़ाकों को राइफल चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता था लेकिन बुनियादी तौर पर गोला बारूद का ही प्रशिक्षण दिया जाता था।
विद्रोहियों ने रोल्पा शहर के होलेरी में एक पुलिस चौकी पर पहली बार वर्ष 2001 में हमला किया था।
सरकार ने तब इसे गम्भीरता से लिया जब माओवादियों ने करीब 70 पुलिकर्मियों को बंदी बनाया और उनकी हत्या कर दी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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