येदियुरप्पा पर अभियोग चलाने की मंजूरी, भाजपा का बंद का आह्वान (राउंडअप)

उधर, येदियुरप्पा ने राज्यपाल के इस निर्णय को 'लोकतंत्र एवं न्याय की दिनदहाड़े हत्या' करार दिया। जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्यपाल के निर्णय के विरोध में शनिवार को कर्नाटक बंद का आह्वान किया।

गत 28 दिसम्बर को इस खुलासे के बाद कि येदियुरप्पा ने बेंगलुरू और उसके आस पास के महत्वपूर्ण भूमि आवंटन में अपने रिश्तेदारों का पक्ष लिया है। बेंगलुरू के दो वकीलों ने सिराजीन बाशन और के.एन. बलराज ने मुख्यमंत्री के खिलाफ आपराधिक अभियोग चलाने की अनुमति मांगी थी।

भारद्वाज ने उल्लेख किया कि बशा और बलराज ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून 1988 की धारा 19 (1) और अपराध प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 197 के तहत मुख्यमंत्री के खिलाफ अभियोग चलाने के लिए अनुमति देने की मांग की है।

राज्यपाल कार्यालय से जारी विज्ञप्ति में कहा गया, "उनकी दलीलों पर राज्यपाल ने विचार किया और उन्होंने मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा पर अभियोग चलाने की मंजूरी दी। उन्होंने इस आशय का आदेश शाम को पारित किया।"

ज्ञात हो कि दोनों वकीलों ने गृह मंत्री आर. अशोक पर भी अभियोग चलाने के लिए राज्यपाल से अनुमति मांगी थी लेकिन राजभवन से जारी विज्ञप्ति में उनके बारे में कुछ भी नहीं किया गया है।

बशा ने आईएएनएस को बताया कि सोमवार को बेंगलुरू न्यायालय में येदियुरप्पा के खिलाफ एक आपराधिक मुकदमा दायर किया जाएगा।"

बशा ने कहा, "मुख्यमंत्री के खिलाफ अभियोग चलाने की अनुमति देने पर हम राज्यपाल के कृतज्ञ हैं। याचिका का मसौदा तैयार करने के लिए हम अपने वकील के साथ सम्पर्क में हैं। आपराधिक मुकदमे को सोमवार को 23वें विशेष न्यायालय में दायर किया जाएगा।"

विपक्षी दलों कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) ने राज्यपाल के इस निर्णय का स्वागत किया, जबकि भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली राज्यपाल के इस निर्णय की निंदा की।

मुख्यमंत्री द्वारा भारद्वाज को लिखे पत्र जिसे मीडिया में जारी किया गया है, उसमें येदियुरप्पा ने कहा कि उनके द्वारा नियुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी राज्यपाल और उनके प्रधान सचिव से मिला लेकिन उसे अभियोग के आदेश की प्रति नहीं दी गई।

येदियुरप्पा ने कहा कि उनके खिलाफ अभियोग चलाने की मंजूरी की रिपोर्ट मीडिया में देखने के बाद, " मैंने अपने एक वरिष्ठ अधिकारी को अभियोग की मंजूरी के आदेश की एक प्रति लेने के लिए राजभवन भेजा।"

मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा, "कार्य के लिए नियुक्त अधिकारी आपसे और आपके प्रधान सचिव से मिला, उसने आदेश की एक प्रति देने का अनुरोध किया। मैं समझता हूं कि राज्यपाल ने आदेश की एक प्रति उपलब्ध कराने से इंकार किया।"

उन्होंने कहा, "यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य का संवैधानिक प्रमुख होते हुए आदेश की एक प्रति मुझे नहीं दी गई और इस तरह के आदेश की सूचना मीडिया में जारी की गई।"

येदियुरप्पा ने राज्यपाल के इस कदम को 'राजनीतिक रूप से प्रेरित और असंवैधानिक' बताया है। उन्होंने कहा, "राज्यपाल अपने कार्यालय में राजनीतिक एजेंडा का पालन कर रहे हैं। उन्होंने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतो से दूर जाकर मनमाने और पक्षपातपूर्ण तरीके से काम किया है।"

जनता दल सेक्युलर के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा ने भारद्वाज के निर्णय का स्वागत करते हुए येदियुरप्पा के इस्तीफे के मांग की है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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